शिव-शक्ति श्रीराम मिलन भाग- 3 (पार्वती का जन्म)
सतीजी ने भरी सभा मे क्रोधित होकर कहाँ कि, चन्द्रमा को ललाट पर धारण करने वाले वृषकेतु शिवजी को हृदय में धारण करके मैं इस शरीर को तुरंत ही त्याग दूँगी। ऐसा कहकर सतीजी ने योगाग्नि में अपना शरीर भस्म कर डाला। सारी यज्ञशाला में हाहाकार मच गया। तब सती का मरण सुनकर शिवजी के गण यज्ञ विध्वंस करने लगे।
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