वाल्मीकि रामायण- बालकाण्ड सर्ग- ३४

बालकाण्ड सर्ग- ३४ यह महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित संस्कृत का महाकाव्य और स्मृति का एक अंग है। और पापो का नाश कराने वाले श्रीरामचन्द्र जी के जीवन की गाथा है।

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वाल्मीकि रामायण- बालकाण्ड सर्ग- ३३

बालकाण्ड सर्ग- ३३ यह महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित संस्कृत का महाकाव्य और स्मृति का एक अंग है। और पापो का नाश कराने वाले श्रीरामचन्द्र जी के जीवन की गाथा है।

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वाल्मीकि रामायण- बालकाण्ड सर्ग- ३२

बालकाण्ड सर्ग- ३२ यह महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित संस्कृत का महाकाव्य और स्मृति का एक अंग है। और पापो का नाश कराने वाले श्रीरामचन्द्र जी के जीवन की गाथा है।

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वाल्मीकि रामायण- बालकाण्ड सर्ग- ३१

बालकाण्ड सर्ग- ३१ यह महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित संस्कृत का महाकाव्य और स्मृति का एक अंग है। और पापो का नाश कराने वाले श्रीरामचन्द्र जी के जीवन की गाथा है।

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वाल्मीकि रामायण- बालकाण्ड सर्ग- ३०

बालकाण्ड सर्ग- ३० यह महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित संस्कृत का महाकाव्य और स्मृति का एक अंग है। और पापो का नाश कराने वाले श्रीरामचन्द्र जी के जीवन की गाथा है।

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वाल्मीकि रामायण- बालकाण्ड सर्ग- २९

बालकाण्ड सर्ग- २९ यह महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित संस्कृत का महाकाव्य और स्मृति का एक अंग है। और पापो का नाश कराने वाले श्रीरामचन्द्र जी के जीवन की गाथा है।

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वाल्मीकि रामायण- बालकाण्ड सर्ग- २८

बालकाण्ड सर्ग- २८ यह महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित संस्कृत का महाकाव्य और स्मृति का एक अंग है। और पापो का नाश कराने वाले श्रीरामचन्द्र जी के जीवन की गाथा है।

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वाल्मीकि रामायण- बालकाण्ड सर्ग- २७

बालकाण्ड सर्ग- २७ यह महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित संस्कृत का महाकाव्य और स्मृति का एक अंग है। और पापो का नाश कराने वाले श्रीरामचन्द्र जी के जीवन की गाथा है।

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वाल्मीकि रामायण- बालकाण्ड सर्ग- २६

बालकाण्ड सर्ग- २६ यह महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित संस्कृत का महाकाव्य और स्मृति का एक अंग है। और पापो का नाश कराने वाले श्रीरामचन्द्र जी के जीवन की गाथा है।

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वाल्मीकि रामायण- बालकाण्ड सर्ग- २५

बालकाण्ड सर्ग- २५ यह महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित संस्कृत का महाकाव्य और स्मृति का एक अंग है। और पापो का नाश कराने वाले श्रीरामचन्द्र जी के जीवन की गाथा है।

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वाल्मीकि रामायण- बालकाण्ड सर्ग- २४

बालकाण्ड सर्ग- २४ यह महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित संस्कृत का महाकाव्य और स्मृति का एक अंग है। और पापो का नाश कराने वाले श्रीरामचन्द्र जी के जीवन की गाथा है।

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वाल्मीकि रामायण- बालकाण्ड सर्ग- २३

बालकाण्ड सर्ग- २३ यह महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित संस्कृत का महाकाव्य और स्मृति का एक अंग है। और पापो का नाश कराने वाले श्रीरामचन्द्र जी के जीवन की गाथा है।

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वाल्मीकि रामायण- बालकाण्ड सर्ग- २२

बालकाण्ड सर्ग- २२ यह महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित संस्कृत का महाकाव्य और स्मृति का एक अंग है। और पापो का नाश कराने वाले श्रीरामचन्द्र जी के जीवन की गाथा है।

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वाल्मीकि रामायण- बालकाण्ड सर्ग- २१

बालकाण्ड सर्ग- २१ यह महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित संस्कृत का महाकाव्य और स्मृति का एक अंग है। और पापो का नाश कराने वाले श्रीरामचन्द्र जी के जीवन की गाथा है।

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वाल्मीकि रामायण- बालकाण्ड सर्ग- २०

बालकाण्ड सर्ग- २० यह महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित संस्कृत का महाकाव्य और स्मृति का एक अंग है। और पापो का नाश कराने वाले श्रीरामचन्द्र जी के जीवन की गाथा है।

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वाल्मीकि रामायण- बालकाण्ड सर्ग- १९

बालकाण्ड सर्ग- १९ यह महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित संस्कृत का महाकाव्य और स्मृति का एक अंग है। और पापो का नाश कराने वाले श्रीरामचन्द्र जी के जीवन की गाथा है।

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वाल्मीकि रामायण- बालकाण्ड सर्ग- १८

बालकाण्ड सर्ग- १८ यह महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित संस्कृत का महाकाव्य और स्मृति का एक अंग है। और पापो का नाश कराने वाले श्रीरामचन्द्र जी के जीवन की गाथा है।

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वाल्मीकि रामायण- बालकाण्ड सर्ग- १७

बालकाण्ड सर्ग- १७ यह महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित संस्कृत का महाकाव्य और स्मृति का एक अंग है। और पापो का नाश कराने वाले श्रीरामचन्द्र जी के जीवन की गाथा है।

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वाल्मीकि रामायण- बालकाण्ड सर्ग- १६

बालकाण्ड सर्ग- १६ यह महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित संस्कृत का महाकाव्य और स्मृति का एक अंग है। और पापो का नाश कराने वाले श्रीरामचन्द्र जी के जीवन की गाथा है।

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शिव-शक्ति श्रीराम मिलन भाग- 15 (धनुषयज्ञ और सीताजी का वर्णन)

हे सीता! हमारी सच्ची आसीस सुनो, तुम्हारी मनःकामना पूरी होगी। नारदजी का वचन सदा पवित्र (संशय, भ्रम आदि दोषों से रहित) और सत्य है। जिसमें तुम्हारा मन अनुरक्त हो गया है, वही वर तुमको मिलेगा। इस प्रकार श्री गौरीजी का आशीर्वाद सुनकर जानकीजी समेत सब सखियाँ हृदय में हर्षित हुईं।

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शिव-शक्ति श्रीराम मिलन भाग- 14 (राम-सीता का प्रथम मिलन)

सीताजी की शोभा देखकर श्री रामजी ने बड़ा सुख पाया। हृदय में वे उसकी सराहना करते हैं, किन्तु मुख से वचन नहीं निकलते। (वह शोभा ऐसी अनुपम है) मानो ब्रह्मा ने अपनी सारी निपुणता को मूर्तिमान कर संसार को प्रकट करके दिखा दिया हो।

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शिव-शक्ति श्रीराम मिलन भाग- 13 (ताड़का वध और अहल्या उद्धार)

राजा ने बड़े ही आदर से दोनों पुत्रों को बुलाया और हृदय से लगाकर बहुत प्रकार से उन्हें शिक्षा दी। (फिर कहा-) हे नाथ! ये दोनों पुत्र मेरे प्राण हैं। हे मुनि! (अब) आप ही इनके पिता हैं, दूसरा कोई नहीं। राजा ने बहुत प्रकार से आशीर्वाद देकर पुत्रों को ऋषि के हवाले कर दिया।

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शिव-शक्ति श्रीराम मिलन भाग- 12 (नामकरण सस्कार और बाललीला)

शिव-शक्ति श्रीराम मिलन गुरु वशिष्‍ठजी ने हृदय में विचार कर कहा- हे राजन्‌! तुम्हारे चारों पुत्र वेद के तत्त्व (साक्षात्‌ परात्पर भगवान) हैं। जो ब्राह्मणों के ऋणी, मुनियों के धन, भक्तों के सर्वस्व और शिवजी के प्राण हैं, उन्होंने (इस समय तुम लोगों के प्रेमवश) बाल लीला के रस में सुख माना है।

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शिव-शक्ति श्रीराम मिलन भाग- 11 (श्रीराम का अवतार)

श्रीराम ने कहा- दशरथ और कौसल्या के रूप में मनुष्यों के राजा होकर श्री अयोध्यापुरी में प्रकट हुए हैं। उन्हीं के घर जाकर मैं रघुकुल में श्रेष्ठ चार भाइयों के रूप में अवतार लूँगा। नारद के सब वचन मैं सत्य करूँगा और अपनी पराशक्ति के सहित अवतार लूँगा।

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शिव-शक्ति श्रीराम मिलन भाग- 10 (पृथ्वी की व्याकुलता)

धर्म के प्रति लोगों की अतिशय ग्लानि देखकर पृथ्वी अत्यन्त भयभीत एवं व्याकुल हो गई। वह सोचने लगी कि पर्वतों, नदियों और समुद्रों का बोझ मुझे इतना भारी नहीं जान पड़ता, जितना भारी मुझे एक परद्रोही (दूसरों का अनिष्ट करने वाला) लगता है। धरती वहाँ गई, जहाँ सब देवता और मुनि (छिपे) थे। पृथ्वी ने रोकर उनको अपना दुःख सुनाया।

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