॥ 卐 ॥
॥ श्री गणेशाय नमः ॥
॥ श्री कमलापति नम: ॥
॥ श्री जानकीवल्लभो विजयते ॥
॥ जय माता दी ॥दान करें 🗳
Pay By UPI
Name:- Manish Kumar Chaturvedi
Mobile:- +919554988808
Click On UPI Id:-
9554988808@hdfcbank
sirmanishkumar@ybl
9554988808@ybl
9554988808-2@yblPay In Account
श्री दुर्गा सप्तशती
श्री दुर्गा सप्तशती, जिसे दुर्गा सप्तशती सुंदरकांड या चंडीपाठ भी कहा जाता है, एक प्रसिद्ध हिंदू पौराणिक पाठ है जिसमें मां दुर्गा की महिमा, शक्ति और महासागरी शक्ति का वर्णन किया गया है। इस पाठ को चंडीपाठ के रूप में भी जाना जाता है, क्योंकि यह चंडी माता की महिमा पर आधारित है। यह पाठ माता दुर्गा के प्रमुख रूपों जैसे कि शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्माण्डा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी एवं सिद्धिदात्री की महिमा को विस्तार से वर्णित करता है।
पहला खण्ड ‘प्रथम चरित्र’ है, जिसमें माता दुर्गा का उद्धार और उनकी महिमा का वर्णन होता है। दूसरा खण्ड ‘मध्यम चरित्र’ है, जिसमें माता दुर्गा के विभिन्न रूपों का वर्णन होता है। तीसरा खण्ड ‘उत्तर चरित्र’ है, जिसमें देवी के भक्तों द्वारा उनकी स्तुति की जाती है और उनकी कृपा और आशीर्वाद का वर्णन होता है। यह ग्रंथ संस्कृत भाषा में लिखा गया है, लेकिन इसके अनुवाद और टिप्पणी हिंदी और अन्य भाषाओं में उपलब्ध हैं।
दुर्गा सप्तशती का पाठ अधिकांशतः नवरात्रि के दौरान विशेष उत्सव में किया जाता है, जब भक्तों द्वारा मां दुर्गा की पूजा-अर्चना विशेष ध्यान द्वारा की जाती है। यह पाठ सुबह-सुबह आराम से बैठकर या मंदिर में मां दुर्गा की मूर्ति के सामने बैठकर किया जाता है। इसे विशेष विधि के साथ पाठ किया जाता है, जिसमें संपूर्ण दुर्गा सप्तशती के स्तोत्र, मंत्र और कथाओं का विवरण होता है।
देवी कवचम्:
ॐ जातवेदसे सुनवाम सोम मरातीयतो निदहाति वेदः।
स नः पर्षदति दुर्गाणि विश्वा नावेव सिन्धुं दुरितात्यग्निः॥
मां दुर्गा के नाम:
ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते॥
दुर्गा सप्तशती के पाठ से आप माँ दुर्गा की कृपा प्राप्त कर सकते हैं और शक्ति को प्राप्त करने में सहायता प्राप्त कर सकते हैं। यह आपके जीवन में सुख, समृद्धि, सफलता और शांति को प्रवेश करने में मदद कर सकता है।
दुर्गा सप्तशती के पाठ के लिए आप पहले इसके पाठ की विधि और नियमों को समझे और पाठ करने के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन करें:
- पूजा स्थल का सजावट करें: एक पवित्र स्थान चुनें जहां आप दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहते हैं। माता दुर्गा की मूर्ति या छवि को सजाएं और धूप, दीप, फूल आदि से पूजा सामग्री तैयार करें।
- संकल्प: मन से दुर्गा सप्तशती का संकल्प लें। इसमें आप अपने उद्देश्य का निर्धारण कर सकते हैं, जैसे कि सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य या किसी दैविक कार्य के लिए।
- गणेश पूजन: गणेश जी की पूजा करें और उनसे आशीर्वाद लें कि आपके दुर्गा सप्तशती का पाठ सुरक्षित और सफल हो।
- प्रारंभिक मंत्र: पहले दो मंत्रों को जपें – ॐ अस्य श्रीदुर्गासप्तशतीमान्त्रस्य नारायण ऋषिः, अनुष्टुप् छंदः, श्री दुर्गा परमेश्वरी देवता।
- चंडीपाठ: दुर्गा सप्तशती के मंत्रों का पाठ करें। आप एक बार या नवरात्रि के दौरान नौ दिनों तक इसे पढ़ सकते हैं।
- उपासना और आरती: दुर्गा सप्तशती का पाठ करने के बाद, मां दुर्गा की उपासना करें और उन्हें आरती दें। आप भजन या मंत्रों को भी गाने के लिए चुन सकते हैं।
- प्रशाद वितरण: पाठ के अंत में, मां दुर्गा को प्रशाद के रूप में कुछ मिठाई या प्रिय भोग समर्पित करें और उसे वितरित करें।
दुर्गा सप्तशती के पाठ में कुल 700 श्लोक होते हैं, जो तीन भागों में विभाजित होता है। प्रथम भाग में १-१३ अध्याय होते हैं, जिन्हें पूर्व में पठने की प्रथा होती है। द्वितीय भाग में १४-२७ अध्याय होते हैं जो विचारित होते हैं। तृतीय भाग में २८-४० अध्याय होते हैं जिन्हें उत्तर में पठने की प्रथा होती है। ये अध्याय माता दुर्गा की महिमा, विजय एवं आशीर्वाद का वर्णन करते हैं।
श्री दुर्गा सप्तशती पाठ विधान
श्री दुर्गा सप्तशती के पाठ करने का अलग विधान है। कुछ अध्यायों में उच्च स्वर, कुछ में मंद और कुछ में शांत मुद्रा में बैठकर पाठ करना श्रेष्ठ माना गया है। जैसे कीलकम मंत्र को शांत मुद्रा में बैठकर मानसिक पाठ करना श्रेष्ठ है। देवी कवचम उच्च स्वर में और श्री अर्गलास्तोत्रम का प्रारम्भ उच्च स्वर और समापन शांत मुद्रा से करना चाहिए। देवी भगवती के कुछ मंत्र यंत्र, मंत्र और तंत्र क्रिया के हैं। संपूर्ण दुर्गा सप्तशती स्वर विज्ञान का एक हिस्सा है।
वाकार विधिः
श्री दुर्गा सप्तशती के पाठ से पहले नवार्ण मंत्र (ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं दुर्गायै नमः। या ॐ दुं दुर्गाय नम:। या ॐ दुर्गाये नम:) के अलावा कीलकम, कवचम और अर्गलास्तोत्रम का पाठ जरूर करें। इसके बाद ही श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ प्रारंभ करें। एवं साथ ही यह प्रयास करें की संपूर्ण श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ सात दिन (सप्ताह) मे ही समाप्त हो। जैसे:- प्रथम दिन एक पाठ प्रथम अध्याय, दूसरे दिन दो पाठ द्वितीय, तृतीय अध्याय, तीसरे दिन एक पाठ चतुर्थ अध्याय, चौथे दिन चार पाठ पंचम, षष्ठ, सप्तम व अष्टम अध्याय, पांचवें दिन दो अध्यायों का पाठ नवम, दशम अध्याय, छठे दिन ग्यारहवां अध्याय, सातवें दिन दो पाठ द्वादश एवं त्रयोदश अध्याय करके एक आवृति सप्तशती की होती है।
या आप स्वयं भी अपनी सुविधानुसार प्रतिदिन श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ नीचे विस्तार पूर्वक कर सकते है।
📕 • संपूर्ण श्री दुर्गा सप्तशती.pdf:- ₹151 ₹5 📥
- शीर्ष 10 दृश्य:
- श्री दुर्गा सप्तशती | Shri Durga Saptashati
- श्रीमद्भगवद् गीता I ShriBhagavadGeeta
- श्रीरामचरितमानस भावार्थ सहित- बालकाण्ड- 201-225
- बालकाण्ड | Balkanda
- सुन्दरकाण्ड | Sundarkanda
- श्री सत्यनारायण व्रत कथा संस्कृत में हिन्दी भावार्थ सहित
- लंकाकाण्ड | Lankakanda
- उत्तरकाण्ड | Uttarakhanda
- अरण्यकाण्ड | Aranyakanda
- किष्किन्धाकाण्ड | Kishkindhakanda











