सुख-शान्ति प्राप्ति हेतु मंत्रो का जाप | Chanting Of Mantras

सुख-शान्ति और समृद्धि प्राप्ति हेतु प्रतिदिन मंत्रों का जाप करें!

मंत्रों का जाप

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 (साप्ताहिक अपडेट)

मंत्रों का जाप

मंत्रों का जाप

सनातन धर्म (हिन्दू धर्म) में मंत्रों को बहुत महत्व दिया जाता है। शास्त्रों, पुराणों और धर्म के अनुसार मंत्रों में बहुत शक्ति होती है। किसी भी मंत्र का उच्चारण यदि सही ढंग और सही तरीके से किया जाए तो उसका प्रभाव पूरे ब्रह्माण्ड में सकारात्मक ही पड़ता है, मंत्रों का उच्चारण अपने आस-पास सकारात्मक प्रभाव का संचार करता है।

यह स्वंय शिवजी द्वारा माता जगदम्बा से कही गई एक पवित्र कथा है। आप भी विस्तार पूर्वक पढ़े:
शिव-शक्ति श्रीराम मिलन (संपूर्ण भाग) 🌞

माना जाता है कि हर एक मंत्र से अलग-अलग तरह का प्रभाव और शक्ति उत्पन्न होती है। मंत्रों की शक्ति से व्यक्ति अपने जीवन को बदल सकता है। मंत्र के जाप से मानसिक शान्ति भी मिलती है। हिन्दू धर्म धर्म में कोई भी शुभ कार्य बिना मंत्रों के नहीं किया जाता। अधिकतर लोग पूजा के समय गायत्री मत्र और महामृत्युंजय मंत्र का लगभग नित्य जाप करते हैं। कोई भी मंत्र घर या मंदिर कहीं भी, यदि सच्ची श्रद्धा के साथ किया जाए, तो यह विशेष फलदायी होता है।

शास्त्रों मे वर्णित है कि यदि मंत्रों का जाप पूर्ण तरीके से किया जाए तो श्रद्धा और भी बढ़ जाती है। मंत्र का जाप करने के लिए विशेष माला का प्रयोग किया जाता है लेकिन आज के समय में शुद्ध माला का मिलना या सभी जगह उसे लेकर घूमना उचित नही होता। इस समस्या को ध्यान मे रखते हुए हमने (कभी भी और कही भी मंत्रो का जाप करने के लिए) यह पेज तैयार किया है। आप इसका सरलतापूर्वक उपयोग कर सकते है।

यदि आप आत्मिक चक्र से संबंधित मंत्रों का जाप करना चाहते है तब यहाँ खोजें और फिर नीचें बॉक्स मे जाकर मंत्र का चयन कर जाप प्रारंभ करें:

  1. मूलाधार चक्र:- इसका मन्त्र ”लं” है।
  2. स्वाधिष्ठान चक्र:- इसका मन्त्र ”वं“ है।
  3. मणिपुर चक्र:- इसका मन्त्र “रं” है।
  4. अनाहत चक्र:- इसका मन्त्र “यं“ है।
  5. विशुद्धि चक्र:- इसका मन्त्र “हं“ है।
  6. आज्ञा चक्र:- इसका मन्त्र “ॐ” है।
  7. सहस्रार चक्र:- इसका मन्त्र “ङ” है।

मंत्र जाप के कुछ नियम:

-मंत्र जाप करते समय मंत्र जाप करने वाले के मुद्रा पद्मासन या सुखासन (अर्थात जिस मुद्रा से आपके शरीर को सुख मिले) में होनी चाहिए।

-कोशिश करें जाप शुद्ध उच्चारित और सही संख्या में किया जाए, क्योंकि जाप हमेशा एक निश्चित संख्या में ही किया जाता है। जैसे:- 11, 21, 51, 108, 1008, संख्या में ही हो। शास्त्रों में 108 संख्या शुभ माना गया है।

-जाप करते समय पूर्व दिशा की तरफ अपना मुख रखें। जाप बटन को हमेशा दायें हाथ के अंगुठे से ही दबाए। यह भी ध्यान रखें कि आपने अंगुठे के नाखून का स्पर्श न करें।

-मंत्र जाप एकाग्रचित मन से करना अधिक फलदायी और संतुष्टि प्रदान करने वाला होता है। एकाग्रता बनाए रखने के लिए जाप करते समय लाल बिन्दु को ध्यान पूर्वक देखते रहें।


लाल-बिन्दु



स्वेच्छापूर्वक मंत्र का चयन करें:

  

यदि आप कोई जाप मंत्र बढ़वाना/जुड़वाना चाहते है तब कृपया हमें कमेन्ट बॉक्स मे अवस्य बताए।

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