अखंड रामायण | Akhand Ramayan

अखंड रामायण सत्य कथाओं पर आधारित सभी रामायणो का संगम है।


॥ श्री गणेशाय नमः ॥
॥ श्री कमलापति नम: ॥
॥ श्री जानकीवल्लभो विजयते ॥
॥ श्री रामचरित मानस ॥
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अखंड रामायण

अखंड रामायण
(भावार्थ सहित व रहित)
सब एक ही स्थान पर

यह स्वंय शिवजी द्वारा माता जगदम्बा से कही गई एक पवित्र कथा है। आप भी विस्तार पूर्वक पढ़े:
शिव-शक्ति श्रीराम मिलन (संपूर्ण भाग) 🌞

अखंड रामायण

अंग्रेज़ी मे

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📕 • तुलसीदास द्वारा रचित अंग्रेज़ी मे:- ₹11

📕 • वाल्मीकी द्वारा रचित अंग्रेज़ी मे:- ₹21

“अखंड रामायण” भारतीय संस्कृति मे एक विशेष स्थान रखती है। वैसे तो अखंड रामायण के बहुत सारे संस्करण इन्टरनेट पर दिख जायेंगे, परन्तु मैंने यंहा पर सम्पूर्ण रामायण (श्रीरामचरितमानस, वाल्मीकि रामायण) एकत्रित करने का प्रयास किया है।
(अखंड रामायण के निम्न ग्रन्थ जो आपके लिए यहॉं उपलब्ध हैं।)

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अखंड रामायण

अखंड रामायण का विधिपूर्वक पाठ करने से पुर्व श्री गोस्वामी तुलसीदास, श्री महर्षि वाल्मीकि, श्री शिवजी तथा श्री हनुमानजी का आवाहन- पूजन करने के पश्चात् तीनों भाइयों सहित श्रीसीतारामजी का आवाहन, षोडशोपचार-पूजन और ध्यान करना चाहिये। तदन्तर पाठ का आरम्भ करना चाहियेः-
पारायण विधि

॥ आवाहन मन्त्रः ॥

श्रीकमलापति नमस्तुभ्यमिहागच्छ कृपानिधे।
पुरतः स्थित्वा मम पूजनं स्वीकुरुष्व मे॥
ॐ श्रीकमलापति गुरूदेवाय नमः

तुलसीक नमस्तुभ्यमिहागच्छ शुचिव्रत।
नैर्ऋत्य उपविश्येदं पूजनं प्रतिगृह्यताम्॥१॥
ॐ तुलसीदासाय नमः

श्रीवाल्मीक नमस्तुभ्यमिहागच्छ शुभप्रद।
उत्तरपूर्वयोर्मध्ये तिष्ठ गृह्णीष्व मेऽर्चनम्॥२॥
ॐ वाल्मीकाय नमः

गौरीपते नमस्तुभ्यमिहागच्छ महेश्वर।
पूर्वदक्षिणयोर्मध्ये तिष्ठ पूजां गृहाण मे॥३॥
ॐ गौरीपतये नमः

श्रीलक्ष्मण नमस्तुभ्यमिहागच्छ सहप्रियः।
याम्यभागे समातिष्ठ पूजनं संगृहाण मे॥४॥
ॐ श्रीसपत्नीकाय लक्ष्मणाय नमः

श्रीशत्रुघ्न नमस्तुभ्यमिहागच्छ सहप्रियः।
पीठस्य पश्चिमे भागे पूजनं स्वीकुरुष्व मे॥५॥
ॐ श्रीसपत्नीकाय शत्रुघ्नाय नमः

श्रीभरत नमस्तुभ्यमिहागच्छ सहप्रियः।
पीठकस्योत्तरे भागे तिष्ठ पूजां गृहाण मे॥६॥
ॐ श्रीसपत्नीकाय भरताय नमः

श्रीहनुमन्नमस्तुभ्यमिहागच्छ कृपानिधे।
पूर्वभागे समातिष्ठ पूजनं स्वीकुरु प्रभो॥७॥
ॐ हनुमते नमः

अथ प्रधानपूजा च कर्तव्या विधिपूर्वकम्।
पुष्पाञ्जलिं गृहीत्वा तु ध्यानं कुर्यात्परस्य च॥८॥
रक्ताम्भोजदलाभिरामनयनं पीताम्बरालंकृतं
श्यामांगं द्विभुजं प्रसन्नवदनं श्रीसीतया शोभितम्।
कारुण्यामृतसागरं प्रियगणैर्भ्रात्रादिभिर्भावितं
वन्दे विष्णुशिवादिसेव्यमनिशं भक्तेष्टसिद्धिप्रदम्॥९॥
आगच्छ जानकीनाथ जानक्या सह राघव।
गृहाण मम पूजां च वायुपुत्रादिभिर्युतः॥१०॥

इत्यावाहनम्

सुवर्णरचितं राम दिव्यास्तरणशोभितम्।
आसनं हि मया दत्तं गृहाण मणिचित्रितम्॥११॥

॥ इति षोडशोपचारैः पूजयेत् ॥

ॐ अस्य श्रीमन्मानसरामायणश्रीरामचरितस्य श्रीशिवकाकभुशुण्डियाज्ञवल्क्यगोस्वामीतुलसीदासा ऋषयः श्रीसीतरामो देवता श्रीरामनाम बीजं भवरोगहरी भक्तिः शक्तिः मम नियन्त्रिताशेषविघ्नतया श्रीसीतारामप्रीतिपूर्वकसकलमनोरथसिद्धयर्थं पाठे विनियोगः।

अथाचमनम्

श्रीसीतारामाभ्यां नमः।
श्रीरामचन्द्राय नमः।
श्रीरामभद्राय नमः।
इति मन्त्रत्रितयेन आचमनं कुर्यात्।
श्रीयुगलबीजमन्त्रेण प्राणायामं कुर्यात्॥

अथ करन्यासः

जग मंगल गुन ग्राम राम के। दानि मुकुति धन धरम धाम के॥
अगुंष्ठाभ्यां नमः
राम राम कहि जे जमुहाहीं। तिन्हहि न पापपुंज समुहाहीं॥
तर्जनीभ्यां नमः
राम सकल नामन्ह ते अधिका। होउ नाथ अघ खग गन बधिका॥
मध्यमाभ्यां नमः
उमा दारु जोषित की नाईं। सबहि नचावत रामु गोसाईं॥
अनामिकाभ्यां नमः
सन्मुख होइ जीव मोहि जबहीं। जन्म कोटि अघ नासहिं तबहीं॥
कनिष्ठिकाभ्यां नमः
मामभिरक्षय रघुकुल नायक। धृत बर चाप रुचिर कर सायक॥
करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः

॥ इति करन्यासः ॥

॥ अथ ह्रदयादिन्यासः ॥


जग मंगल गुन ग्राम राम के। दानि मुकुति धन धरम धाम के॥
ह्रदयाय नमः।
राम राम कहि जे जमुहाहीं। तिन्हहि न पापपुंज समुहाहीं॥
शिरसे स्वाहा।
राम सकल नामन्ह ते अधिका। होउ नाथ अघ खग गन बधिका॥
शिखायै वषट्।
उमा दारु जोषित की नाईं। सबहि नचावत रामु गोसाईं॥
कवचाय हुम्
सन्मुख होइ जीव मोहि जबहीं। जन्म कोटि अघ नासहिं तबहीं॥
नेत्राभ्यां वौषट्
मामभिरक्षय रघुकुल नायक। धृत बर चाप रुचिर कर सायक॥
अस्त्राय फट्

॥ इति ह्रदयादिन्यासः ॥

॥ अथ ध्यानम् ॥

मामवलोकय पंकजलोचन। कृपा बिलोकनि सोच बिमोचन॥
नील तामरस स्याम काम अरि। ह्रदय कंज मकरंद मधुप हरि॥
जातुधान बरुथ बल भंजन। मुनि सज्जन रंजन अघ गंजन॥
भूसुर ससि नव बृंद बलाहक। असरन सरन दीन जन गाहक॥
भुजबल बिपुल भार महि खंडित। खर दूषन बिराध बध पंडित॥
रावनारि सुखरुप भूपबर। जय दसरथ कुल कुमुद सुधाकर॥
सुजस पुरान बिदित निगमागम। गावत सुर मुनि संत समागम॥
कारुनीक ब्यलीक मद खंडन। सब विधि कुसल कोसला मंडन॥
कलि मल मथन नाम ममताहन। तुलसिदास प्रभु पाहि प्रनत जन॥

॥ इति ध्यान: ॥

श्रीरामचरितमानस

गोस्वामी तुलसीदासजी कृत महाकाव्य श्रीरामचरितमानस मूल अवधी भाषा एवं हिन्दी में भावार्थ सहित यहाँ “अखंड रामायण” के नाम से उपलब्ध है। यह प्रयास धर्मार्थ किया गया है। इसका उद्देश्य जन-जन की प्रिय MNSGranth से इंटरनेट के पाठकों को भी जोड़ना है। “भावार्थ सहित” प्रतिदिन पाठ करने के उद्देश्य से…

श्रीरामचरितमानस पाठ

गोस्वामी तुलसीदासजी कृत महाकाव्य श्रीरामचरितमानस मूल अवधी भाषा में यहाँ “अखंड रामायण” के नाम से उपलब्ध है। यह प्रयास धर्मार्थ किया गया है। इसका उद्देश्य जन-जन की प्रिय MNSGranth से इंटरनेट के पाठकों को भी जोड़ना है। “भावार्थ रहित” प्रतिदिन “कभी भी और कही भी” पाठ करने के उद्देश्य से…

शिव-शक्ति श्रीराम मिलन

𝕄ℕ𝕊𝔾𝕣𝕒𝕟𝕥𝕙 की यह अत्यन्त ही सुन्दर प्रस्तुति है। यह स्वंय शिवजी द्वारा माता जगदम्बा से कही गई एक पवित्र कथा है। जो कलयुग के संपूर्ण पापो का नाश करने वाले श्रीरामचन्द्र जी पर आधारित है। इस पवित्र कथा का आरम्भ होता है, माता शक्ति द्वारा जो उचित समय जाकर शिवजी से कहती है- हे देवताओं के स्वामी!…

वाल्मीकि रामायण

आदि कवि महर्षि वाल्मीकि कृत महाकाव्य वाल्मीकि रामायण मूल संस्कृत भाषा एवं हिन्दी में भावार्थ सहित यहाँ “अखंड रामायण” के नाम से उपलब्ध है। यह प्रयास धर्मार्थ किया गया है। इसका उद्देश्य जन-जन की प्रिय MNSGranth से इंटरनेट के पाठकों को भी जोड़ना है। “भावार्थ सहित” प्रतिदिन पाठ करने के उद्देश्य से…

सुन्दरकाण्ड पाठ

सुन्दरकाण्ड श्रीरामचरितमानस का पंचम भाग है। इस काण्ड में हनुमान का लंका प्रस्थान, लंका दहन से लेकर लंका से वापसी तक के घटनाक्रम आते हैं। श्रीरामचरितमानस श्रीरामचंद्र जी के गुणों और उनके पुरुषार्थ को दर्शाती है किन्तु सुन्दरकांड एकमात्र ऐसा अध्याय है, जो सिर्फ हनुमानजी की शक्ति और विजय का काण्ड है। यहॉं हिन्दी एवं अंग्रेजी भावार्थ मे उपलब्ध।

अखंड रामायण की सीख

स्क्रॉल ऊपर और नीचे करें:-↕

• रामायण के सारे चरित्र अपने धर्म का पालन करते हैं।
• राम एक आदर्श पुत्र हैं। पिता की आज्ञा उनके लिये सर्वोपरि है। पति के रूप में राम ने सदैव एकपत्नीव्रत का पालन किया। राजा के रूप में प्रजा के हित के लिये स्वयं के हित को हेय समझते हैं। विलक्षण व्यक्तित्व है उनका। वे अत्यन्त वीर्यवान, तेजस्वी, विद्वान, धैर्यशील, जितेन्द्रिय, बुद्धिमान, सुंदर, पराक्रमी, दुष्टों का दमन करने वाले, युद्ध एवं नीतिकुशल, धर्मात्मा, मर्यादापुरुषोत्तम, प्रजावत्सल, शरणागत को शरण देने वाले, सर्वशास्त्रों के ज्ञाता एवं प्रतिभा सम्पन्न हैं।
• सीता का पातिव्रत महान है। सारे वैभव और ऐश्ववर्य को ठुकरा कर वे पति के साथ वन चली गईं।
• रामायण भातृ-प्रेम का भी उत्कृष्ट उदाहरण है। जहाँ बड़े भाई के प्रेम के कारण लक्ष्मण उनके साथ वन चले जाते हैं वहीं भरत अयोध्या की राज गद्दी पर, बड़े भाई का अधिकार होने के कारण, स्वयं न बैठ कर राम की पादुका को प्रतिष्ठित कर देते हैं।
• कौशल्या एक आदर्श माता हैं। अपने पुत्र राम पर कैकेयी के द्वारा किये गये अन्याय को भुला कर वे कैकेयी के पुत्र भरत पर उतनी ही ममता रखती हैं जितनी कि अपने पुत्र राम पर।
• हनुमान एक आदर्श भक्त हैं, वे राम की सेवा के लिये अनुचर के समान सदैव तत्पर रहते हैं। शक्तिबाण से मूर्छित लक्ष्मण को उनकी सेवा के कारण ही प्राणदान प्राप्त होता है।
• रावण के चरित्र से सीख मिलती है कि अहंकार नाश का कारण होता है।
• रामायण के चरित्रों से सीख लेकर मनुष्य अपने जीवन को सार्थक बना सकता है।
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अखंड रामायण FAQ?

अखंड रामायण क्या होता है?

अखंड रामायण श्रीरामचरितमानस और वाल्मीकि रामायण को ही कहते है। महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित वाल्मीकि रामायण उत्तर भारत मे कम पढ़ा जाता है। परन्तु गोस्वामी तुलसीदास जी कृत श्रीरामचरितमानस को उत्तर भारत में प्रतिदिन बहुत से लोगों द्वारा पढ़ा जाता है। श्री रामचरितमानस के पाठ को बिना खंडित किए, अत्यंत शुद्ध और स्पष्ट रूप से, प्रेम व भक्ति भाव से सीधा-सीधा पढ़ा जाता है। यह अखंड पाठ ही अखंड रामायण के नाम से प्रचलित है। यहॉं विस्तार पूर्वक पढ़े..

अखंड रामायण | Akhand Ramayan

अखंड रामायण कितने घंटे का होता है?

अखंड रामायण कि विशेषता है कि इसे कम से कम 21 घंटे और अधिकतम 24 घंटे की अवधि मे संपूर्ण करना ही उचित होता है। अखंड रामायण से वातावरण में सकरात्मक ऊर्जा प्रवाहित होती है, जो मन को असीम शांति प्रदान करती है।

अखंड रामायण | Akhand Ramayan

अखंड रामायण कब करना उचित होता है?

अखंड रामायण का पाठ प्रतिदिन सुबह के समय करना चाहिए। सुबह जल्दी उठकर नित्यकर्म और स्नान के बाद घर के मंदिर में पूजा करें। इसके बाद भगवान के सामने आसन पर बैठकर अखंड रामायण का पाठ करना चाहिए। यहॉं श्रीरामचरितमानस, वाल्मीकि रामायण एवं सुन्दरकाण्ड पाठ भावार्थ सहित उपलब्ध है।

अखंड रामायण | Akhand Ramayan

अखंड रामायण कैसे पढ़ी जाती है?

अखंड रामायण(Akhand Ramayan) पाठ के दौरान सबसे अधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि जब तक पाठ पूर्ण न हो जाए तब तक लगातार पाठ चलना चाहिए। और बीच में कोई रुकावट नहीं होना चाहिए। जहाँ पर पाठ चल रहा हो वहाँ अन्य कोई भी अनर्गल बात किसी को नहीं करना चाहिए और न ही पाठ करने वालों को पाठ के बीच मे इधर-उधर किसी से कुछ बोलना चाहिए। विस्तार पूर्वक पढ़े..

अखंड रामायण | Akhand Ramayan

अखंड रामायण पढ़ने के क्या नियम है?

अखंड रामायण का पाठ करने से पहले चौकी पर सुंदर वस्त्र बिछाकर भगवान श्रीराम की प्रतिमा स्थापित करें। और सर्वप्रथम हनुमान जी का आह्वाहन करें व उन्हें श्रीराम कथा में आमंत्रित करें। ऐसा माना जाता है कि भगवान श्रीराम जी के पूजन से पूर्व हनुमान जी का आह्वाहन करना अनिवार्य होता है। जिससे पूजा का हमे सही फल मिल सके और सही समय पर पाठ पूर्ण हो सके। विस्तार पूर्वक पाठ करें..

अखंड रामायण | Akhand Ramayan

श्रीभगवद्गीताश्री गरुड़पुराण

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