श्री हनुमान चालीसा भावार्थ सहित | Hanuman Chalisa

श्री हनुमान चालीसा भावार्थ सहित एवं पाठ करने के नियम

श्री हनुमान चालीसा
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॥ श्री गणेशाय नमः ॥
॥ श्री कमलापति नम: ॥
॥ श्री जानकीवल्लभो विजयते ॥
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यह स्वंय शिवजी द्वारा माता जगदम्बा से कही गई एक पवित्र कथा है। आप भी विस्तार पूर्वक पढ़े:
शिव-शक्ति श्रीराम मिलन (संपूर्ण भाग) 🌞

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श्री हनुमान चालीसा भावार्थ सहित

हनुमान चालीसा हम सभी को लगभग पूर्णतः स्मरण है। परन्तु क्या आपको पता है। कि हम हनुमान जी से क्या कहते है और क्या पढ़ते है। शायद नही…??
इस लिए आप की सुविधा के लिए हम श्री हनुमान चालीसा (हिन्दी और English) भावार्थ सहित उपल्बध करा रहे है। कृपया अपनी प्रतिक्रिया अवश्य व्यक्त करें। और संभव हो तब शेयर कर अपने अन्य मित्रगण तक भी पहुंचाए।

कई लोग हनुमान चालीसा नियमित पढ़ते हैं और कई लोग मंगलवार या शनिवार को ही हनुमान चालीसा पढ़ते हैं। लेकिन बहुत कम लोग यह जानते हैं कि हनुमान चालीसा पढ़ने का सही तरीका क्या है। आओ जानते हैं कि किस तरह पढ़ना चाहिए हनुमान चालीसा कि हमें मिले उत्तम फल।

हनुमान चालीसा पाठ के नियम
1. आह्‍वान :- हनुमान चालीसा का पाठ करने के पहले कई लोग उनका और श्रीरामजी का आह्‍वान करके पाठ नहीं करते हैं।

2. समय :- हनुमान चालीसा का पाठ करने के लिए समय निर्धारित करना चाहिए। कई लोग जब उनका मन करता है तब उसका पाठ करते हैं और जब मन करता है तब नहीं। यह गलती कई लोग करते हैं।

3. स्थान :- हनुमान चालीसा एक पवित्र जगह पर बैठकर ही करना चाहिए। खासकर या तो आपके घर के पूजास्थल पर, मंदिर में, तीर्थ क्षेत्र में या पहले से नियुक्त साफ सफाई करके पवित्र की गई जगह पर। हर कहीं या सड़क पर इसका पाठ नहीं होता।

4. भक्त बनें :- कई लोग हनुमान चालीसा का पाठ तब करते हैं जबकि उनके उपर कोई संकट आता है। कहते हैं कि दुःख में सुमिरन सब करे सुख में करै न कोय। जो सुख में सुमिरन करें तो दु:ख काहे को होऊ।

5. दोहे :- कई लोग पाठ तो करते हैं लेकिन उसके दोहे नहीं पढ़ते हैं जो हनुमान चालीसा का ही अंग है।

6. अर्पण :- हनुमान चालीसा का पाठ करने के पहले उनके चित्र या मूर्ति को पवित्र जल से पवित्र करके उन्हें तुलसी की माला या जनेऊ पहनाकर भक्ति भाव से उनकी पसंद का भोग अर्पण करके कई लोग हनुमान चालीसा नहीं पढ़ते हैं।

7. मध्यम स्वर :- कई लोग हनुमान चालीसा का पाठ ऊंचे स्वर में अशुद्ध उच्चारण के साथ करते हैं या एकदम नीचे स्वर में इसका पाठ करते हैं। यह गलती सभी करते हैं।

8. चालीसा दिन तक पाठ :- 100 बार हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए। सौ बार नहीं कर सको तो 11 बार करो। 11 बार न हो तो 9 बार करो। 9 बार नहीं कर सको तो 7 बार करो। 7 बार न कर सको तो 5 बार करो और 5 बार न कर सको तो 3 बार करो और 3 बार भी नहीं कर सकते हो तो 1 बार प्रतिदिन करो चालीसा और कम से कम 40 दिन तक करने के बाद उन्हें लंगोट जरूर भेंट करें।

9. पवित्रता :- हनुमान चालीसा के पाठ के दौरान ब्रह्मचर्य, पवित्रता, शुद्धता, साफ सफाई का ध्यान कई लोग नहीं रखते हैं। महिलाएं यदि हनुमान चालीसा का पाठ कर रही हैं तो उन्हें इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि वे उन्हें टच न करें। कई लोग यह गलती करते हैं।

10. खुद के नाम का उच्चारण :- यह भी मान्यता है कि जहां पर लिखा है कि ‘तुलसीदास सदा हरि चेरा कीजै नाथ हृदय मंह डेरा।’ यहां तुलसीदास की जगह आपको आपके नाम का उच्चारण करना चाहिए। कई लोग यह गलती करते हैं इसीलिए उन्हें लाभ प्राप्त नहीं होता है।

11. दीपक :- हनुमान चालीसा के पाठ के पहले दीप प्रज्वलित जरूर करना चाहिए। दीपक में जो बाती लगाई जा रही है वह भी लाल सूत (धागे) की होनी चाहिए। किसी भी स्थल पर पूजा करने के पूर्व दीप जरूर प्रज्वलित करें। हनुमान पूजा के दौरान जो दीपक जला रहे हों उसमें चमेली का तेल या शुद्ध घी होना चाहिए।

12. वस्त्र :- हनुमानजी चालीका पाठ के दौरान सिर्फ एक वस्त्र पहनकर ही चालीसा का पाठ करें या उनकी पूजा करें।

13. आसन :- हनुमान मूर्ति या चित्र को लकड़ी के पाठ पर लाल कपड़ा बिछाकर स्थापित करें और खुद कुश के आसन पर बैठकर ही चालीसा का पाठ करें या पूजा करें।

14. पाठ आवृत्ति :- 100 बार हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए। सौ बार नहीं कर सको तो 11 बार करो। 11 बार न हो तो 9 बार करो। 9 बार नहीं कर सको तो 7 बार करो। 7 बार न कर सको तो 5 बार करो और 5 बार न कर सको तो 3 बार करो और 3 बार भी नहीं कर सकते हो तो 1 बार प्रतिदिन करो।

हनुमान चालीसा का पाठ करते वक्त यदि आप इन बातों का ध्यान रखते हैं तो आपको हनुमान जी की कृपा जरूर प्राप्त होती है।

श्री हनुमान चालीसा भावार्थ सहित

दोहा:
श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुरु सुधारि।
बरनऊँ रघुवर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥1॥

Doha:
Shri Guru Charan Saroj Raj, Nij mane mukure sudhari.
Varnao Raghuvar Vimal Jasu, Jo dayaku phal chari.

गुरु महाराज के चरण कमलों की धूलि से अपने मन रुपी दर्पण को पवित्र करके श्री रघुवीर के निर्मल यश का वर्णन करता हूँ, जो चारों फल धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को देने वाला है।

After cleansing the mirror of my mind with the pollen dust of holy Guru’s Lotus feet. I Profess the pure, untainted glory of Shri Raghuvar which bestows the four-fold fruits of life. (Dharma, Artha, Kama and Moksha)


दोहा:
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरो पवन कुमार।
बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेश विकार॥2॥

Doha:
Budhihin Tanu Janike, Sumirau Pavan Kumar.
Bal budhi Vidya dehu mohi, Harahu Kalesa Vikar.

Fully aware of the deficiency of my intelligence, I concentrate my attention on Pavan Kumar and humbly ask for strength, intelligence, and true knowledge to relieve me of all blemishes, causing pain.


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जय हनुमान ज्ञान गुण सागर, जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥1॥

Jai Hanuman gyan gun sagar, Jai Kapis tihun lok ujagar.

श्री हनुमान जी! आपकी जय हो। आपका ज्ञान और गुण अथाह है। हे कपीश्वर! आपकी जय हो! तीनों लोकों,स्वर्ग लोक, भूलोक और पाताल लोक में आपकी कीर्ति है।

Victory to thee, O’Hanuman! Ocean of Wisdom-All hail to you O’Kapisa! (fountain-head of power, wisdom, and Shiva-Shakti) You illuminate all the three worlds (Entire cosmos) with your glory.


राम दूत अतुलित बलधामा, अंजनी पुत्र पवन सुत नामा॥2॥

Ram doot atulit bal dhama, Anjani-putra Pavan sut nama.

हे पवनसुत आप राम के दूत-(प्रिय और भरोसेमंद) आपके समान दूसरा बलवान नही। आप अंजनी नंदन! और पवनपुत्र के नाम से भी जाने जाते है।

You are the divine messenger of Shri Ram. The repository of immeasurable strength, though known only as Son of Pavan (Wind), born of Anjani.


महावीर विक्रम बजरंगी, कुमति निवार सुमति के संगी॥3॥

Mahavir Vikram Bajrangi, Kumati nivar sumati Ke sangi.

हे महावीर बजरंग बली! आप विशेष पराक्रम वाले है। आप खराब बुद्धि को दूर करते है, और अच्छी बुद्धि वालो के साथी, सहायक है।

With Limbs as sturdy as Vajra (The mace of God Indra) you are valiant and brave. On you attends good Sense and Wisdom. You dispel the darkness of evil thoughts.


कंचन बरन बिराज सुबेसा, कानन कुण्डल कुंचित केसा॥4॥

Kanchan varan viraj subesa, Kanan Kundal Kunchit Kesa.

आप सुनहले रंग, सुन्दर वस्त्रों, कानों में कुण्डल और घुंघराले बालों से सुशोभित हैं।

Your physique is beautiful golden coloured and your dress is pretty. You wear earrings and have long curly hair.


हाथ ब्रज और ध्वजा विराजे, काँधे मूँज जनेऊ साजै॥5॥

Hath Vajra Aur Dhuvaje Viraje, Kandhe moonj janehu sajai.

आपके हाथ मे बज्र और ध्वजा है और कन्धे पर मूंज के जनेऊ की शोभा है।

You carry in your hand a lightening bolt along with a victory (Kesari) flag and wear the sacred thread on your shoulder.


शंकर सुवन केसरी नंदन, तेज प्रताप महा जग वंदन॥6॥

Sankar suvan kesri Nandan, Tej pratap maha jag vandan.

हे शंकर के अवतार! हे केसरी नंदन! आपके पराक्रम और महान यश की संसार भर मे वन्दना होती है।

As a descendant of Lord Sankar, you are a comfort and pride of Shri Kesari. With the luster of your Vast Sway, you are propitiated all over the universe.


विद्यावान गुणी अति चातुर, राम काज करिबे को आतुर॥7॥

Vidyavan guni ati chatur, Ram kaj karibe ko aatur.

आप प्रकान्ड विद्या निधान है, गुणवान और अत्यन्त कार्य कुशल होकर श्री राम काज करने के लिए आतुर रहते है।

You are the repository of learning, virtuous, and fully accomplished, always keen to carry out the behest’s of Shri Ram.


प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया, राम लखन सीता मन बसिया॥8॥

Prabu charitra sunibe ko rasiya, Ram Lakhan Sita man Basiya.

आप श्री राम चरित सुनने मे आनन्द रस लेते है। श्री राम, सीता और लखन आपके हृदय मे बसे रहते है।

You are an ardent listener, always so keen to listen to the narration of Shri Ram’s Life Stories. Your heart is filled with what Shri Ram stood for. You therefore always dwell in the hearts of Shri Ram, Lakshman, and Sita.


सूक्ष्म रुप धरि सियहिं दिखावा, बिकट रुप धरि लंक जरावा॥9॥

Sukshma roop dhari Siyahi dikhava, Vikat roop dhari lanka jarava.

आपने अपना बहुत छोटा रुप धारण करके सीता जी को दिखलाया और भयंकर रूप करके.लंका को जलाया।

You appeared before Sita in a Diminutive form and spoke to her in humility. You assumed an awesome form and struck terror by setting Lanka on fire.


भीम रुप धरि असुर संहारे, रामचन्द्र के काज संवारे॥10॥

Bhima roop dhari asur sanghare, Ramachandra ke kaj sanvare.

With over-whelming might, you destroyed the Asuras (demons) and performed all tasks assigned to you by Shri Ram with great skill.


लाय सजीवन लखन जियाये, श्री रघुवीर हरषि उर लाये॥11॥

Laye Sanjivan Lakhan Jiyaye, Shri Raghuvir Harashi ur laye.

आपने संजीवनी बुटी लाकर लक्ष्मणजी को जिलाया जिससे श्री रघुवीर ने हर्षित होकर आपको हृदय से लगा लिया।

You brought Sanjivan (A herb that revives life) and restored Lakshman back to life, Shri Raghuvir (Shri Ram) cheerfully embraced you with his heart full of joy.


रघुपति कीन्हीं बहुत बड़ाई, तुम मम प्रिय भरत सम भाई॥12॥

Raghupati Kinhi bahut badai, Tum mam priye Bharat-hi sam bhai.

श्री रामचन्द्र ने आपकी बहुत प्रशंसा की और कहा की तुम मेरे भरत जैसे प्यारे भाई हो।

Shri Raghupati (Shri Ram) lustily extolled your excellence and said: “You are as dear to me as my own brother Bharat.”


सहस बदन तुम्हरो जस गावैं, अस कहि श्री पति कंठ लगावैं॥13॥

Sahas badan tumharo yash gaave, Us kahi Shripati kanth lagaave.

श्री राम ने आपको यह कहकर हृदय से.लगा लिया की तुम्हारा यश हजार मुख से सराहनीय है।

Thousands of living beings are chanting hymns of your glories; saying thus, Shri Ram warmly hugged him (Shri Hanuman).


सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा, नारद,सारद सहित अहीसा॥14॥

Sankadik Brahmadi Muneesa, Narad Sarad sahit Aheesa.

श्री सनक, श्री सनातन, श्री सनन्दन, श्री सनत्कुमार आदि मुनि ब्रह्मा आदि देवता नारद जी, सरस्वती जी, शेषनाग जी सब आपका गुण गान करते है।

When prophets like Sanka, even the Sage like Lord Brahma, the great hermit Narad himself, Goddess Saraswati and Ahisha.


जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते, कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते॥15॥

Jam Kuber Digpal Jahan te, Kavi kovid kahi sake kahan te.

यमराज,कुबेर आदि सब दिशाओं के रक्षक, कवि विद्वान, पंडित या कोई भी आपके यश का पूर्णतः वर्णन नहीं कर सकते।

Even Yamraj (God of Death) Kuber (God of Wealth) and the Digpals (deputies guarding the four corners of the Universe) have been vying with one another in offering homage to your glories. How then, can a mere poet give adequate expression of your super excellence.


तुम उपकार सुग्रीवहि कीन्हा, राम मिलाय राजपद दीन्हा॥16॥

Tum upkar Sugreevahin keenha, Ram milaye rajpad deenha.

आपनें सुग्रीव जी को श्रीराम से मिलाकर उपकार किया, जिसके कारण वे राजा बने।

You rendered a great service to Sugriv. You united him with Shri Ram and due to which he became the king.


तुम्हरो मंत्र विभीषण माना, लंकेस्वर भए सब जग जाना॥17॥

Tumharo mantra Vibheeshan mana, Lankeshwar Bhaye Sub jag jana.

आपके उपदेश का विभिषण जी ने पालन किया जिससे वे लंका के राजा बने, इसको सब संसार जानता है।

By heeding your advice, Vibhishan became Lord of Lanka. This is known all over the Universe.


जुग सहस्त्र जोजन पर भानू, लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥18॥

Jug sahastra jojan par Bhanu, Leelyo tahi madhur phal janu.

जो सूर्य इतने योजन दूरी पर है की उस पर पहुँचने के लिए हजार युग लगे। उस हजारों योजन की दूरी पर स्थित सूर्य को आपने एक मीठा फल समझ कर निगल लिया।

On your own you dashed upon the Sun, which is at a fabulous distance of thousands of miles, thinking it to be a sweet luscious fruit.


प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहि, जलधि लांघि गये अचरज नाहीं॥19॥

Prabhu mudrika meli mukh mahee, Jaladhi langhi gaye achraj nahee.

आपने श्री रामचन्द्र जी की अंगूठी मुँह मे रखकर समुद्र को लांघ लिया, इसमें कोई आश्चर्य नही है।

Carrying the Lord’s Signet Ring in your mouth, there is hardly any wonder that you easily leapt across the ocean.


दुर्गम काज जगत के जेते, सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥20॥

Durgaam kaj jagat ke jete, Sugam anugraha tumhre tete.

संसार मे जितने भी कठिन से कठिन काम हो, वो आपकी कृपा से सहज हो जाते है।

The burden of all difficult tasks of the world become light with your kind grace.


राम दुआरे तुम रखवारे, होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥21॥

Ram duware tum rakhvare, Hoat na aagya binu paisare.

श्री रामचन्द्र जी के द्वार के आप रखवाले है, जिसमे आपकी आज्ञा बिना किसी को प्रवेश नही मिलता अर्थात आपकी प्रसन्नता के बिना राम कृपा दुर्लभ है।

You are the sentry at the door of Shri Ram’s Divine Abode. No one can enter it without your permission.


सब सुख लहै तुम्हारी सरना, तुम रक्षक काहू को डरना॥22॥

Sub sukh lahai tumhari sarna, Tum rakshak kahu ko dar na.

जो भी आपकी शरण मे आते है, उस सभी को आन्नद प्राप्त होता है, और जब आप रक्षक. है, तो फिर किसी का डर नही रहता।

All comforts of the world lie at your feet. The devotees enjoy all divine pleasures and feel fearless under your benign Protection.


आपन तेज सम्हारो आपै, तीनों लोक हाँक ते काँपै॥23॥

Aapan tej samharo aapai, Teenhon lok hank te kanpai.

आपके सिवाय आपके वेग को कोई नही रोक सकता, आपकी गर्जना से तीनों लोक काँप जाते है।

You alone are befitted to carry your own splendid valour. All the three worlds (entire universe) tremor at your thunderous call.


भूत पिशाच निकट नहिं आवै, महावीर जब नाम सुनावै॥24॥

Bhoot pisach Nikat nahin aavai, Mahavir jab naam sunavai.

जहाँ महावीर हनुमान जी का नाम सुनाया जाता है, वहाँ भूत, पिशाच पास भी नही फटक सकते।

All the ghosts, demons, and evil forces keep away, with the sheer mention of your great name, O’Mahaveer!


नासै रोग हरै सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा॥25॥

Nase rog harai sab peera, Japat nirantar Hanumant beera.

वीर हनुमान जी! आपका निरंतर जप करने से सब रोग चले जाते है,और सब पीड़ा मिट जाती है।

All diseases, pain, and suffering disappear on reciting regularly Shri Hanuman’s holy name.


संकट तें हनुमान छुड़ावै, मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥26॥

Sankat se Hanuman chudavai, Man Karam Vachan dyan jo lavai.

हे हनुमान जी! विचार करने मे, कर्म करने मे और बोलने मे, जिनका ध्यान आपमे रहता है, उनको सब संकटो से आप छुड़ाते है।

Those who remember Shri Hanuman in thought, words, and deeds with Sincerity and Faith, are rescued from all crises in life.


सब पर राम तपस्वी राजा, तिनके काज सकल तुम साजा॥27॥

Sub par Ram tapasvee raja, Tin ke kaj sakal Tum saja.

तपस्वी राजा श्री रामचन्द्र जी सबसे श्रेष्ठ है, उनके सब कार्यो को आपने सहज मे कर दिया।

All who hail, worship, and have faith in Shri Ram as the Supreme Lord and the king of penance. You make all their difficult tasks very easy.


और मनोरथ जो कोइ लावै, सोई अमित जीवन फल पावै॥28॥

Aur manorath jo koi lavai, Sohi amit jeevan phal pavai.

जिस पर आपकी कृपा हो, वह कोई भी अभिलाषा करे तो उसे ऐसा फल मिलता है जिसकी जीवन मे कोई सीमा नही होती।

Whosoever comes to you for the fulfillment of any desire with faith and sincerity, Will he alone secure the imperishable fruit of human life.


चारों जुग परताप तुम्हारा, है परसिद्ध जगत उजियारा॥29॥

Charon jug partap tumhara, Hai persidh jagat ujiyara.

चारो युगों सतयुग, त्रेता, द्वापर तथा कलियुग मे आपका यश फैला हुआ है, जगत मे आपकी कीर्ति सर्वत्र प्रकाशमान है।

All through the four ages, your magnificent glory is acclaimed far and wide. Your fame is Radiantly acclaimed all over the Cosmos.


साधु सन्त के तुम रखवारे, असुर निकंदन राम दुलारे॥30॥

Sadhu Sant ke tum Rakhware, Asur nikandan Ram dulhare.

हे श्री राम के दुलारे! आप.सज्जनों की रक्षा करते है और दुष्टों का नाश करते है।

You are Saviour and the guardian angel of Saints and Sages and destroy all Demons. You are the angelic darling of Shri Ram.


अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता, अस बर दीन जानकी माता॥31॥

Ashta sidhi nav nidhi ke dhata, Us var deen Janki mata.

आपको माता श्री जानकी से ऐसा वरदान मिला हुआ है, जिससे आप किसी को भी आठों सिद्धियां और नौ निधियां दे सकते है।

You can grant to anyone, any yogic power of Eight Siddhis (power to become light and heavy at will) and Nine Nidhis (Riches, comfort, power, prestige, fame, sweet relationship, etc.) This boon has been conferred upon you by Mother Janki.


अष्ट सिद्धियाँ =》
1.) अणिमा → जिससे साधक किसी को दिखाई नही पड़ता और कठिन से कठिन पदार्थ मे प्रवेश कर.जाता है।
2.) महिमा → जिसमे योगी अपने को बहुत बड़ा बना देता है।
3.) गरिमा → जिससे साधक अपने को चाहे जितना भारी बना लेता है।
4.) लघिमा → जिससे जितना चाहे उतना हल्का बन जाता है।
5.) प्राप्ति → जिससे इच्छित पदार्थ की प्राप्ति होती है।
6.) प्राकाम्य → जिससे इच्छा करने पर वह पृथ्वी मे समा सकता है, आकाश मे उड़ सकता है।
7.) ईशित्व → जिससे सब पर शासन का सामर्थय हो जाता है।
8.) वशित्व → जिससे दूसरो को वश मे किया जाता है।

राम रसायन तुम्हरे पासा, सदा रहो रघुपति के दासा॥32॥

Ram rasayan tumhare pasa, Sada raho Raghupati ke dasa.

आप निरंतर श्री रघुनाथ जी की शरण मे रहते है, जिससे आपके पास बुढ़ापा और असाध्य रोगों के नाश के लिए राम नाम औषधि है।

You possess the power of devotion to Shri Ram. In all rebirths, you will always remain Shri Raghupati’s most dedicated disciple.


तुम्हरे भजन राम को पावै, जनम जनम के दुख बिसरावै॥33॥

Tumhare bhajan Ram ko pavai, Janam janam ke dukh bisravai.

आपका भजन करने से श्री राम जी प्राप्त होते है, और जन्म जन्मांतर के दुःख दूर होते है।

Through hymns sung in devotion to you, one can find Shri Ram and become free from the sufferings of several births.


अन्त काल रघुबर पुर जाई, जहाँ जन्म हरि भक्त कहाई॥34॥

Anth kaal Raghuvir pur jayee, Jahan janam Hari-Bakht Kahayee.

अंत समय श्री रघुनाथ जी के धाम को जाते है और यदि फिर भी जन्म लेंगे तो भक्ति करेंगे और श्री राम भक्त कहलायेंगे।

If at the time of death one enters the Divine Abode of Shri Ram, thereafter in all future births he is born as the Lord’s devotee.


और देवता चित न धरई, हनुमत सेई सर्व सुख करई॥35॥

Aur Devta Chit na dharehi, Hanumanth sehi sarve sukh karehi.

हे हनुमान जी! आपकी सेवा करने से सब प्रकार के सुख मिलते है, फिर अन्य किसी देवता की आवश्यकता नही रहती।

One need not entertain any other deity for Propitiation, as the devotion of Shri Hanuman alone can give all happiness.


संकट कटै मिटै सब पीरा, जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥36॥

Sankat kate mite sab peera, Jo sumirai Hanumat Balbeera.

हे वीर हनुमान जी! जो आपका सुमिरन करता रहता है, उसके सब संकट कट जाते है और सब पीड़ा मिट जाती है।

One is freed from all the sufferings and ill fated contingencies of rebirths in the world. One who adores and remembers Shri Hanuman.


जय जय जय हनुमान गोसाईं, कृपा करहु गुरु देव की नाई॥37॥

Jai Jai Jai Hanuman Gosahin, Kripa Karahu Gurudev ki nyahin.

हे स्वामी हनुमान जी! आपकी जय हो, जय हो, जय हो! आप मुझपर कृपालु श्री गुरु जी के समान कृपा कीजिए।

Hail, Hail, Hail, Shri Hanuman, Lord of senses. Let your victory over the evil be firm and final. Bless me in the capacity as my supreme guru (teacher).


जो सत बार पाठ कर कोई, छुटहि बँदि महा सुख होई॥38॥

Jo sat bar path kare kohi, Chutehi bandhi maha sukh hohi.

जो कोई इस हनुमान चालीसा का सौ बार पाठ करेगा वह सब बन्धनों से छुट जायेगा और उसे परमानन्द मिलेगा।

One who recites Chalisa one hundred times becomes free from the bondage of life and death and enjoys the highest bliss at last.


जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा, होय सिद्धि साखी गौरीसा॥39॥

Jo yah padhe Hanuman Chalisa, Hoye siddhi sakhi Gaureesa.

भगवान शंकर ने यह हनुमान चालीसा लिखवाया, इसलिए वे साक्षी है कि जो इसे पढ़ेगा उसे निश्चय ही सफलता प्राप्त होगी।

All those who recite Hanuman Chalisa (The forty Chaupais) regularly are sure to be benedict. Such is the evidence of no less a witness as Bhagwan Sankar.


तुलसीदास सदा हरि चेरा, कीजै नाथ हृदय मँह डेरा॥40॥

Tulsidas sada hari chera, Keejai naath Hridaye meih dera.

हे नाथ हनुमान जी! तुलसीदास सदा ही श्री राम का दास है।इसलिए आप उसके हृदय मे निवास कीजिए।

Tulsidas as a bonded slave of the Divine Master stays perpetually at his feet, he prays “Oh Lord! You enshrine within my heart & soul.”


दोहाः
पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रुप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥3॥

Doha:
Pavantnai sankat haran, Mangal murti roop. Ram Lakhan Sita sahit, Hrdaye basahu sur bhoop.

हे संकट मोचन पवन कुमार! आप आनन्द मंगलो के स्वरुप है। हे देवराज! आप श्री राम, सीता जी और लक्ष्मण सहित मेरे हृदय मे निवास कीजिए।

Oh! conqueror of the Wind, Destroyer of all miseries, you are a symbol of Auspiciousness. Along with Shri Ram, Lakshman and Sita, reside in my heart. Oh! King of Gods.


卐○ॐ○卐○ॐ○卐○ॐ○卐○ॐ○卐
॥जय श्री राम॥

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