वाल्मीकि रामायण- बालकाण्ड सर्ग- १६

बालकाण्ड सर्ग- १६ यह महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित संस्कृत का महाकाव्य और स्मृति का एक अंग है। और पापो का नाश कराने वाले श्रीरामचन्द्र जी के जीवन की गाथा है।

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वाल्मीकि रामायण- बालकाण्ड सर्ग- १५

बालकाण्ड सर्ग- १५ यह महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित संस्कृत का महाकाव्य और स्मृति का एक अंग है। और पापो का नाश कराने वाले श्रीरामचन्द्र जी के जीवन की गाथा है।

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Hindu Navavarsh हिन्दू नववर्ष का विक्रम संवत 2080 में प्रवेश

नववर्ष संपूर्ण जगत में एक त्यौहार के रूप में मनाया जाता है। दुनिया के भिन्न-भिन्न स्थानों पर नववर्ष की तिथि भी भिन्न-भिन्न होती है। इस साल 2023 में हिन्दू नववर्ष विक्रम संवत 2080, पिंगल संवत्सर का स्वागत बुधवार 22 मार्च 2023 के दिन किया जायेगा। हिन्दू धर्म में इस दिन को शुभ दिन माना जाता है।

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वाल्मीकि रामायण- बालकाण्ड सर्ग- १४

बालकाण्ड सर्ग- १४ यह महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित संस्कृत का महाकाव्य और स्मृति का एक अंग है। और पापो का नाश कराने वाले श्रीरामचन्द्र जी के जीवन की गाथा है।

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वाल्मीकि रामायण- बालकाण्ड सर्ग- १३

बालकाण्ड सर्ग- १३ यह महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित संस्कृत का महाकाव्य और स्मृति का एक अंग है। और पापो का नाश कराने वाले श्रीरामचन्द्र जी के जीवन की गाथा है।

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वाल्मीकि रामायण- बालकाण्ड सर्ग- १२

बालकाण्ड सर्ग- १२ यह महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित संस्कृत का महाकाव्य और स्मृति का एक अंग है। और पापो का नाश कराने वाले श्रीरामचन्द्र जी के जीवन की गाथा है।

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वाल्मीकि रामायण- बालकाण्ड सर्ग- ११

बालकाण्ड सर्ग- ११ यह महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित संस्कृत का महाकाव्य और स्मृति का एक अंग है। और पापो का नाश कराने वाले श्रीरामचन्द्र जी के जीवन की गाथा है।

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शिव-शक्ति श्रीराम मिलन भाग- 15 (धनुषयज्ञ और सीताजी का वर्णन)

हे सीता! हमारी सच्ची आसीस सुनो, तुम्हारी मनःकामना पूरी होगी। नारदजी का वचन सदा पवित्र (संशय, भ्रम आदि दोषों से रहित) और सत्य है। जिसमें तुम्हारा मन अनुरक्त हो गया है, वही वर तुमको मिलेगा। इस प्रकार श्री गौरीजी का आशीर्वाद सुनकर जानकीजी समेत सब सखियाँ हृदय में हर्षित हुईं।

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शिव-शक्ति श्रीराम मिलन भाग- 14 (राम-सीता का प्रथम मिलन)

सीताजी की शोभा देखकर श्री रामजी ने बड़ा सुख पाया। हृदय में वे उसकी सराहना करते हैं, किन्तु मुख से वचन नहीं निकलते। (वह शोभा ऐसी अनुपम है) मानो ब्रह्मा ने अपनी सारी निपुणता को मूर्तिमान कर संसार को प्रकट करके दिखा दिया हो।

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शिव-शक्ति श्रीराम मिलन भाग- 13 (ताड़का वध और अहल्या उद्धार)

राजा ने बड़े ही आदर से दोनों पुत्रों को बुलाया और हृदय से लगाकर बहुत प्रकार से उन्हें शिक्षा दी। (फिर कहा-) हे नाथ! ये दोनों पुत्र मेरे प्राण हैं। हे मुनि! (अब) आप ही इनके पिता हैं, दूसरा कोई नहीं। राजा ने बहुत प्रकार से आशीर्वाद देकर पुत्रों को ऋषि के हवाले कर दिया।

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शिव-शक्ति श्रीराम मिलन भाग- 12 (नामकरण सस्कार और बाललीला)

शिव-शक्ति श्रीराम मिलन गुरु वशिष्‍ठजी ने हृदय में विचार कर कहा- हे राजन्‌! तुम्हारे चारों पुत्र वेद के तत्त्व (साक्षात्‌ परात्पर भगवान) हैं। जो ब्राह्मणों के ऋणी, मुनियों के धन, भक्तों के सर्वस्व और शिवजी के प्राण हैं, उन्होंने (इस समय तुम लोगों के प्रेमवश) बाल लीला के रस में सुख माना है।

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शिव-शक्ति श्रीराम मिलन भाग- 11 (श्रीराम का अवतार)

श्रीराम ने कहा- दशरथ और कौसल्या के रूप में मनुष्यों के राजा होकर श्री अयोध्यापुरी में प्रकट हुए हैं। उन्हीं के घर जाकर मैं रघुकुल में श्रेष्ठ चार भाइयों के रूप में अवतार लूँगा। नारद के सब वचन मैं सत्य करूँगा और अपनी पराशक्ति के सहित अवतार लूँगा।

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शिव-शक्ति श्रीराम मिलन भाग- 10 (पृथ्वी की व्याकुलता)

धर्म के प्रति लोगों की अतिशय ग्लानि देखकर पृथ्वी अत्यन्त भयभीत एवं व्याकुल हो गई। वह सोचने लगी कि पर्वतों, नदियों और समुद्रों का बोझ मुझे इतना भारी नहीं जान पड़ता, जितना भारी मुझे एक परद्रोही (दूसरों का अनिष्ट करने वाला) लगता है। धरती वहाँ गई, जहाँ सब देवता और मुनि (छिपे) थे। पृथ्वी ने रोकर उनको अपना दुःख सुनाया।

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शिव-शक्ति श्रीराम मिलन भाग- 9 (राजा प्रतापभानु)

सम्पूर्ण पृथ्वी मंडल का उस समय प्रतापभानु ही एकमात्र (चक्रवर्ती) राजा था। संसारभर को अपनी भुजाओं के बल से वश में करके राजा ने अपने नगर में प्रवेश किया। प्रजा सब (प्रकार के) दुःखों से रहित और सुखी थी और सभी स्त्री-पुरुष सुंदर और धर्मात्मा थे।

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वाल्मीकि रामायण- बालकाण्ड सर्ग- १०

महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण- बालकाण्ड सर्ग- १० अंगदेश में ऋष्यश्रृंग के आने तथा शान्ता के साथ विवाह होने के प्रसंग का विस्तार के साथ वर्णन।

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शिव-शक्ति श्रीराम मिलन भाग- 8 (मनु और शतरूपा)

शिव-शक्ति श्रीराम मिलन (अष्टम भाग) स्वायम्भुव मनु और (उनकी पत्नी) शतरूपा, जिनसे मनुष्यों की यह अनुपम सृष्टि हुई, आज भी वेद जिनकी मर्यादा का गान करते हैं। एक बार उनके मन में बड़ा दुःख हुआ कि श्री हरि की भक्ति बिना जन्म युँ ही चला गया। तब उन्होंने अपना संपूर्ण….

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वाल्मीकि रामायण- बालकाण्ड सर्ग- ९

महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण- बालकाण्ड सर्ग- ९ सुमन्त्र का दशरथ को ऋष्यशृंग मुनि को बुलाने की सलाह देते हुए उनके अंगदेश जाने और शान्ता से विवाह का प्रसंग सुनाना।

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शिव-शक्ति श्रीराम मिलन भाग- 7 (नारद का मोह)

शिव-शक्ति श्रीराम मिलन (सप्तम भाग) नारद ने श्रीहरि से कहा तुम दूसरों की सम्पदा नहीं देख सकते, तुम्हारे ईर्ष्या और कपट बहुत है। समुद्र मथते समय तुमने शिवजी को बावला बना दिया और देवताओं को प्रेरित करके उन्हें विषपान कराया।

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वाल्मीकि रामायण- बालकाण्ड सर्ग- ८

महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण- बालकाण्ड सर्ग- ८ मे आप पढ़ेंगे राजा दशरथ का पुत्र के लिये अश्वमेध यज्ञ करने का प्रस्ताव और मन्त्रियों तथा ब्राह्मणों द्वारा उनका अनुमोदन।

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शिव-शक्ति श्रीराम मिलन भाग- 6 (श्रीराम अवतार का कारण)

विवाह के बाद जब शिवजी और पार्वती कैलास पर्वत पर पहुँचे, तब सब देवता अपने-अपने लोकों को चले गए। शिव-पार्वती विविध प्रकार के भोग-विलास करते हुए अपने गणों सहित कैलास पर रहने लगे। तभी एक दिन पार्वती ने शिवजी से…

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शिव-शक्ति श्रीराम मिलन भाग- 5 (शिव-पार्वती विवाह)

नारदजी ने पूर्वजन्म की कथा सुनाकर सबको समझाया (और कहा) कि हे मैना! तुम मेरी सच्ची बात सुनो, तुम्हारी यह लड़की साक्षात जगज्जनी भवानी है। ये अजन्मा, अनादि और अविनाशिनी शक्ति हैं। सदा शिवजी के अर्द्धांग में रहती हैं। ये जगत की उत्पत्ति, पालन और संहार करने वाली हैं और अपनी इच्छा से ही लीला शरीर धारण करती हैं।

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शिव-शक्ति श्रीराम मिलन भाग- 4 (शिव बारात)

शिव-शक्ति श्रीराम मिलन (चतुर्थ भाग) श्री रामचन्द्रजी ने बहुत प्रकार से शिवजी को समझाया और पार्वतीजी का जन्म सुनाया। कृपानिधान श्री रामचन्द्रजी ने विस्तार पूर्वक पार्वतीजी की अत्यन्त पवित्र करनी का वर्णन किया।

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शिव-शक्ति श्रीराम मिलन भाग- 3 (पार्वती का जन्म)

सतीजी ने भरी सभा मे क्रोधित होकर कहाँ कि, चन्द्रमा को ललाट पर धारण करने वाले वृषकेतु शिवजी को हृदय में धारण करके मैं इस शरीर को तुरंत ही त्याग दूँगी। ऐसा कहकर सतीजी ने योगाग्नि में अपना शरीर भस्म कर डाला। सारी यज्ञशाला में हाहाकार मच गया। तब सती का मरण सुनकर शिवजी के गण यज्ञ विध्वंस करने लगे।

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शिव-शक्ति श्रीराम मिलन भाग- 2 (सती का आत्मदाह)

सतीजी ने सीताजी का वेष धारण किया, यह जानकर शिवजी के हृदय में बड़ा विषाद हुआ। उन्होंने सोचा कि यदि मैं अब सती से प्रीति करता हूँ तो भक्तिमार्ग लुप्त हो जाता है और बड़ा अन्याय होता है। सती परम पवित्र हैं, इसलिए इन्हें छोड़ते भी नहीं बनता और प्रेम करने में बड़ा पाप है।

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शिव-शक्ति श्रीराम मिलन भाग- 1 (श्रीराम की परीक्षा)

एक बार त्रेता युग में शिवजी अगस्त्य ऋषि के पास गए। उनके साथ जगज्जननी भवानी सतीजी भी थीं। ऋषि ने संपूर्ण जगत्‌ के ईश्वर जानकर उनका पूजन किया। मुनिवर अगस्त्यजी ने रामकथा विस्तार से कही, जिसको महेश्वर ने परम सुख मानकर सुना। फिर ऋषि ने शिवजी से सुंदर हरिभक्ति पूछी और शिवजी ने उनको अधिकारी पाकर (रहस्य सहित) भक्ति का निरूपण किया।

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