📿 आज का पंचांग
श्रावण, शुक्ल पक्ष षष्ठी -मंगलवार 05:43 मध्याह्न तक
🪔 आज की पूजा
शिव पूजा विशेष
🎉 आज का व्रत
सोमवार व्रत
🌅 सूर्योदय
05:41
🌇 सूर्यास्त
18:39
📅 हिन्दू माह
श्रावण
🪔 आज की तिथि
तिथि: शुक्ल पक्ष
षष्ठी -मंगलवार 05:43 मध्याह्न तक
उदयातिथि: षष्ठी
💫 नक्षत्र
स्वाति -बुधवार 03:55 पूर्वाह्न तक
🧘 योग
शुक्ल
🌟 करण
तैतिल
🕉 विक्रम सम्वत्
2083
⏰ राहुकाल
12:48 PM - 02:25 PM
✨ शुभ मुहूर्त
02:25 PM - 04:02 PM
🧭 दिशाशूल
पूर्व दिशा (यात्रा आवश्यक हो तो दर्पण देखकर या दूध पीकर निकलें)
🎨 आज का शुभ रंग
सफेद
🔢 आज का शुभ अंक
2
🙏 आज का उपाय
शिवलिंग पर जल अर्पित करें।
🛕 आज मंदिर दर्शन
शिव मंदिर दर्शन शुभ रहेगा।
🙏 आराध्य देव : भगवान शिव
🎉 आज के पर्व / त्योहार
आज कोई विशेष पर्व नहीं
🔱 आज का मंत्र
ॐ नमः शिवाय
आज का पंचांग | आज की तिथि
आज की तिथि
श्रावण शुक्ल पक्ष षष्ठी -मंगलवार 05:43 मध्याह्न तक
सूर्योदय / सूर्यास्त
05:41
18:39
दिशाशूल
पूर्व दिशा (यात्रा आवश्यक हो तो दर्पण देखकर या दूध पीकर निकलें)
पर्व / त्योहार
आज कोई विशेष पर्व नहीं
आज का मंत्र
ॐ नमः शिवाय
📚 Related Articles
📖 हनुमान चालीसा भावार्थ सहित 📖 संपूर्ण आरती संग्रह 📖 संपूर्ण व्रत कथा 📖 श्री दुर्गा सप्तशती 📖 शिव के 12 ज्योतिर्लिंग स्तोत्र❓ आज के पंचांग से जुड़े सवाल
आज की तिथि क्या है?
शुक्ल पक्ष षष्ठी
आज का व्रत क्या है?
सोमवार व्रत
हिन्दू माह क्या हैै?
श्रावण
हिन्दू वर्ष क्या हैै?
सम्वत् 2083
आज कहां का दिशाशूल है?
पूर्व दिशा (यात्रा आवश्यक हो तो दर्पण देखकर या दूध पीकर निकलें)
आज का शुभ मुहूर्त क्या है?
02:25 PM - 04:02 PM
आज का राहुकाल क्या है?
12:48 PM - 02:25 PM
आज सूर्योदय और सूर्यास्त का समय क्या है?
सूर्योदय:
05:41
सूर्यास्त:
18:39
आज कौन सा पर्व या त्योहार है?
आज कोई विशेष पर्व नहीं
पंचांग से संबंधित जानकारी
दिन का महत्व
इसे वार (सप्ताह का एक दिन) के नाम से भी जाना जाता है। हर दिन किसी ना किसी ग्रह को दर्शाता है।
रविवार (सूर्य)
सोमवार (चंद्रमा)
मंगलवार (मंगल)
बुधवार (बुध)
गुरुवार (बृहस्पति)
शुक्रवार (शुक्र)
शनिवार (शनि)
पंचांग में तिथि का महत्व
हिंदू कैलेंडर या पंचांग में तिथियों का बहुत महत्व है, क्योंकि ये लोगों को नए काम शुरू करने के लिए शुभ समय बताती हैं। शुभ तिथियों के साथ-साथ अशुभ तिथियां भी होती हैं। तिथियां दिन के अलग-अलग समय पर शुरू होती हैं और इनका समय लगभग 19 से 26 घंटे तक हो सकता है। तिथियों के नाम हैं: प्रथमा, द्वितीया, तृतीया, चतुर्थी, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी, चतुर्दशी, अमावस्या और पूर्णिमा।
पंचांग की 30 तिथियों
हिंदू पंचांग की तिथियों को दो भागों में बांटा गया है- शुक्ल और कृष्ण पक्ष। प्रत्येक में कुल 15 तिथि हैं। सामूहिक रूप से कैलेंडर में कुल 30 तिथियां हैं। अमावस्या और पूर्णिमा को छोड़कर सभी तिथियां महीने में दो बार आती हैं। आइए जानते हैं तिथियों के बारे में..
प्रथम / प्रतिपदा
सभी प्रकार के शुभ और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए यह सबसे उपयुक्त तिथि है। इस तिथि के अधिपति देवता अग्नि हैं।
द्वितीया/विद्या
स्थायी इमारत और माकान जैसे अन्य चीजों की नींव रखने के लिए यह उत्तम तिथि है। इस तिथि पर ब्रह्मदेव का आधिपत्य है।
तृतीया / तीज
बाल कटाने, नाखून काटने और मुंडन करवाने के लिए यह अच्छी तिथि मानी जाती है। इस पर देवी गौरी का अधिकार है।
चतुर्थी / चौथ
शत्रुओं के विनाश, बाधाओं को दूर करने के लिए यह तिथि उपयुक्त है। इस तिथि के स्वामी यमदेव व भगवान श्री गणेश है।
पंचमी
यह तिथि सर्जरी करवाने और चिकित्सीय सलाह लेने की दृष्टि से श्रेष्ट है। इस तिथि के अधिपति देवता नाग हैं।
षष्ठी
यह तिथि विशेष अवसरों या उत्सवों को मनाने, नए लोगों से मिलने और नये मित्र बनाने के लिए उत्तम है। इस तिथि के स्वामी देव कार्तिकेय हैं।
सप्तमी
यह तिथि यात्रा शुरू करने और खरीदारी करने के लिए सबसे उत्तम है। इस दिन किसी विशेष कार्य के लिए यात्रा कर रहे हैं तो परिणाम अच्छे मिलने के अधिक आसार होते हैं। क्योंकि इस तिथि पर सूर्यदेव का स्वामित्व है।
अष्टमी
यह तिथि जीत दिलाने वाली है। इस दिन भगवान रुद्र की पूजा करना उत्तम माना जाता है। क्योंकि यह दिन शिव का है। कृष्ण पक्ष में पूजन कारना श्रेष्ट है जबकि शुक्ल पक्ष में इस तिथि में शिव पूजन वर्जित है।
नवमी
यह दिन विनाश और हिंसा के कृत्यों की शुरुआत करता है। तिथि समारोह या यात्रा के लिए अशुभ है। इस दिन पर देवी अंबिका का अधिकार है।
दशमी
पुण्य, धार्मिक व आध्यात्मिक कार्यों और अन्य पवित्र कार्यों के लिए यह तिथि शुभ है। इस दिन के स्वामी धर्मराज हैं।
एकादशी
हिंदू धर्म और जैन धर्म में विशेष धार्मिक महत्व के साथ सबसे शुभ दिनों में से एक है, जो आमतौर पर उपवास और भगवान की भक्ति कर मनाया जाता है। क्योंकि इस तिथि पर देवों के देव महादेव का आधिपत्य है।
द्वादशी
धार्मिक अनुष्ठानों के लिए शुभ है। भगवान विष्णु इस तिथि के स्वामी हैं।
त्रयोदशी
मित्रता करने, कामुक सुख की प्राप्ति और उत्सव मनाने के लिए यह तिथि उत्तम है। इस दिन पर कामदेव का स्वामित्व है।
चतुर्दशी
इस दिन पर देवी काली का अधिकार है। यह दिन प्रेत बाधा को दूर करने के लिए तथा सिद्धि प्राप्त करने के लिए उत्तम है।
पूर्णिमा
व्रत और यज्ञ के लिए उपयुक्त तिथि है। इस दिन कथा सुनने व सुनाने से अधिक फल प्राप्त होता है। पूर्णिमा तिथि पर चंद्रमा का स्वामित्व है।
अमावस्या
यह तिथि पितृ देवों की है। इस दिन पितरों की सेवा व दान करने पर श्रेष्ट फल की प्राप्ति होती है। व्रत के लिए भी यह तिथि विशेष है।
- शीर्ष 10 दृश्य:
- श्री दुर्गा सप्तशती | Shri Durga Saptashati
- श्रीमद्भगवद् गीता I ShriBhagavadGeeta
- श्रीरामचरितमानस भावार्थ सहित- बालकाण्ड- 201-225
- बालकाण्ड | Balkanda
- सुन्दरकाण्ड | Sundarkanda
- श्री सत्यनारायण व्रत कथा संस्कृत में हिन्दी भावार्थ सहित
- लंकाकाण्ड | Lankakanda
- उत्तरकाण्ड | Uttarakhanda
- अरण्यकाण्ड | Aranyakanda
- किष्किन्धाकाण्ड | Kishkindhakanda










