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श्री शिव महापुराण
श्री शिव महापुराण हिन्दू धर्म के महत्वपूर्ण धार्मिक ग्रंथों में से एक है। यह पुराण भगवान शिव की महिमा, उनके अवतार, तत्व, उपासना, व्रत, पूजा, लीलाएं, और उनके भक्तों के कथानकों को विस्तार से वर्णित करता है। यह ग्रंथ संस्कृत भाषा में लिखा गया है परन्तु पाठकों की असुविधा को ध्यान मे रखते हुए यहाँ हिंदी भावार्थ सहित उपलब्ध कराया गया है।
श्री शिव महापुराण शिव भक्तों के बीच बहुत प्रसिद्ध है और उन्हें शिवलिंग की पूजा, शिवरात्रि व्रत, महाशिवरात्रि उत्सव, और शिवाजी के नाम के जप करने की प्रेरणा देता है। इस पुराण के श्रवण एवं पारायण की सुदीर्घ परम्परा चली आ रही है। इसमें मुख्य रूप से भगवान् सदाशिव एवं जगज्जननी माता पार्वती की लीला-कथाओं का विस्तार से प्रतिपादन हुआ है। भक्ति, ज्ञान, सदाचार, शौचाचार, उपासना तथा मानव-जीवन के कल्याण की अनेक उपयोगी बातें इसमें निरूपित हैं। कथाओं का तो यह आकर ग्रन्थ है। शिवज्ञान, शैवीदीक्षा तथा शैवागम की अत्यन्त प्रौढ़ सामग्री इसमें विद्यमान है।
वर्तमान में उपलब्ध शिव महापुराण में सात संहिताएँ हैं, पहली संहिता का नाम विद्येश्वरसंहिता है। दूसरी संहिता रुद्रसंहिता है, जो सृष्टिखण्ड, सतीखण्ड, पार्वतीखण्ड, कुमारखण्ड तथा युद्धखण्ड- इस प्रकार से पाँच खण्डों में विभक्त है। तीसरी संहिता शतरुद्रसंहिता है, चौथी संहिता कोटिरुद्रसंहिता है, पाँचवीं संहिता उमासंहिता है, छठी संहिता का नाम कैलाससंहिता है और सातवीं संहिता वायवीय संहिता के नाम से कही गयी है, जो दो भागों में विभक्त है। इस प्रकार अत्यन्त विस्तृत इस पुराण में लगभग चौबीस हजार (24000) श्लोक हैं।
आशा है, इसके पढ़ने से सम्पूर्ण शिव महापुराण के अध्ययन के प्रति जिज्ञासा उत्पन्न हो सकेगी तथा यह संक्षिप्त ग्रन्थ पाठकों को इस ओर प्रेरणा प्रदान करने में सहायक हो सकेगा।
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