वाल्मीकि रामायण- अयोध्याकाण्ड सर्ग- ४२

अयोध्याकाण्ड सर्ग- ४२ राजा दशरथ का पृथ्वी पर गिरना, श्रीराम के लिये विलाप करना, कैकेयी को अपने पास आने से मना करना और उसे त्याग देना। महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित संस्कृत का महाकाव्य और स्मृति का एक अंग है। और पापो का नाश कराने वाले श्रीरामचन्द्र जी के जीवन की गाथा है।

और अधिक पढ़ें

वाल्मीकि रामायण- अयोध्याकाण्ड सर्ग- ४१

अयोध्याकाण्ड सर्ग- ४१ श्रीराम के वनगमन से रनवास की स्त्रियों का विलाप तथा नगरनिवासियों की शोकाकुल अवस्था। महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित संस्कृत का महाकाव्य और स्मृति का एक अंग है। और पापो का नाश कराने वाले श्रीरामचन्द्र जी के जीवन की गाथा है।

और अधिक पढ़ें

वाल्मीकि रामायण- अयोध्याकाण्ड सर्ग- ४०

अयोध्याकाण्ड सर्ग- ४० सीता, राम और लक्ष्मण का दशरथ की परिक्रमा करके कौसल्या आदि को प्रणाम करना, सीतासहित श्रीराम और लक्ष्मण का रथमें बैठकर वन की ओर प्रस्थान। महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित संस्कृत का महाकाव्य और स्मृति का एक अंग है।

और अधिक पढ़ें

वाल्मीकि रामायण- अयोध्याकाण्ड सर्ग- ३९

अयोध्याकाण्ड सर्ग- ३९ राजा दशरथ का विलाप,कौसल्या का सीता को पतिसेवा का उपदेश, सीता के द्वारा उसकी स्वीकृति। महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित संस्कृत का महाकाव्य और स्मृति का एक अंग है। और पापो का नाश कराने वाले श्रीरामचन्द्र जी के जीवन की गाथा है।

और अधिक पढ़ें

वाल्मीकि रामायण- अयोध्याकाण्ड सर्ग- ३८

अयोध्याकाण्ड सर्ग- ३८ राजा दशरथ का सीता को वल्कल धारण कराना अनुचित बताकर कैकेयी को फटकारना और श्रीराम का उनसे कौसल्या पर कृपादृष्टि रखने के लिये अनुरोध करना।

और अधिक पढ़ें

वाल्मीकि रामायण- अयोध्याकाण्ड सर्ग- ३७

अयोध्याकाण्ड सर्ग- ३७ श्रीराम आदि का वल्कल-वस्त्र-धारण, गुरु वसिष्ठ का कैकेयी को फटकारते हुए सीता के वल्कलधारण का अनौचित्य बताना।

और अधिक पढ़ें

वाल्मीकि रामायण- अयोध्याकाण्ड सर्ग- ३६

अयोध्याकाण्ड सर्ग- ३६ दशरथ का श्रीराम के साथ सेना और खजाना भेजने का आदेश, कैकेयी द्वारा इसका विरोध, राजा का श्रीराम के साथ जाने की इच्छा प्रकट करना।

और अधिक पढ़ें

वाल्मीकि रामायण- अयोध्याकाण्ड सर्ग- ३५

अयोध्याकाण्ड सर्ग- ३५ महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित संस्कृत का महाकाव्य और स्मृति का एक अंग है। और पापो का नाश कराने वाले श्रीरामचन्द्र जी के जीवन की गाथा है।

और अधिक पढ़ें

वाल्मीकि रामायण- अयोध्याकाण्ड सर्ग- ३४

अयोध्याकाण्ड सर्ग- ३४ महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित संस्कृत का महाकाव्य और स्मृति का एक अंग है। और पापो का नाश कराने वाले श्रीरामचन्द्र जी के जीवन की गाथा है।

और अधिक पढ़ें

वाल्मीकि रामायण- अयोध्याकाण्ड सर्ग- ३३

अयोध्याकाण्ड सर्ग- ३३ सीता और लक्ष्मणसहित श्रीराम का दुःखी नगरवासियों के मुख से तरह की बातें सुनते हुए पिता के दर्शन के लिये कैकेयी के महल में जाना।

और अधिक पढ़ें

वाल्मीकि रामायण- अयोध्याकाण्ड सर्ग- ३२

अयोध्याकाण्ड सर्ग- ३२ लक्ष्मण सहित श्रीराम द्वारा ब्राह्मणों, ब्रह्मचारियों, सेवकों, त्रिजट ब्राह्मण और सुहृज्जनों को धन का वितरण। महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित संस्कृत का महाकाव्य और स्मृति का एक अंग है।

और अधिक पढ़ें

वाल्मीकि रामायण- अयोध्याकाण्ड सर्ग- ३१

अयोध्याकाण्ड सर्ग- ३१ महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित संस्कृत का महाकाव्य और स्मृति का एक अंग है। श्रीराम और लक्ष्मण का संवाद, श्रीराम की आज्ञा से लक्ष्मण का सुहृदों से पूछकर और दिव्य आयुध लाकर वनगमन के लिये तैयार होना।

और अधिक पढ़ें

वाल्मीकि रामायण- अयोध्याकाण्ड सर्ग- ३०

अयोध्याकाण्ड सर्ग- ३० महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित संस्कृत का महाकाव्य और स्मृति का एक अंग है। और पापो का नाश कराने वाले श्रीरामचन्द्र जी के जीवन की गाथा है।

और अधिक पढ़ें

वाल्मीकि रामायण- अयोध्याकाण्ड सर्ग- २९

अयोध्याकाण्ड सर्ग- २९ सीता का श्रीराम के समक्ष उनके साथ अपने वनगमन का औचित्य बताना। यह महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित संस्कृत का महाकाव्य और स्मृति का एक अंग है।

और अधिक पढ़ें

वाल्मीकि रामायण- अयोध्याकाण्ड सर्ग- २८

अयोध्याकाण्ड सर्ग- २८ श्रीराम का वनवास के कष्ट का वर्णन करते हुए सीता को वहाँ चलने से मना करना। यह महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित संस्कृत का महाकाव्य और स्मृति का एक अंग है। और पापो का नाश कराने वाले श्रीरामचन्द्र जी के जीवन की गाथा है।

और अधिक पढ़ें

वाल्मीकि रामायण- अयोध्याकाण्ड सर्ग- २७

अयोध्याकाण्ड सर्ग- २७ सीता की श्रीराम से अपने को भी साथ ले चलने के लिये प्रार्थना। महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित संस्कृत का महाकाव्य और स्मृति का एक अंग है। और पापो का नाश कराने वाले श्रीरामचन्द्र जी के जीवन की गाथा है।

और अधिक पढ़ें

वाल्मीकि रामायण- अयोध्याकाण्ड सर्ग- २६

अयोध्याकाण्ड सर्ग- २६ श्रीराम को उदास देखकर सीता का उनसे इसका कारण पूछना और श्रीराम का वन में जाने का निश्चय बताते हुए सीता को घर में रहने के लिये समझाना।

और अधिक पढ़ें

वाल्मीकि रामायण- अयोध्याकाण्ड सर्ग- २५

अयोध्याकाण्ड सर्ग- २५ कौसल्या का श्रीराम की वनयात्रा के लिये मङ्गलकामनापूर्वक स्वस्तिवाचन करना और श्रीराम का उन्हें प्रणाम करके सीता के भवन की ओर जाना।

और अधिक पढ़ें

वाल्मीकि रामायण- AI अयोध्याकाण्ड सर्ग- २४

AI अयोध्याकाण्ड सर्ग- २४ महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित संस्कृत का महाकाव्य और स्मृति का एक अंग है। और पापो का नाश कराने वाले श्रीरामचन्द्र जी के जीवन की गाथा है।

और अधिक पढ़ें

वाल्मीकि रामायण- AI अयोध्याकाण्ड सर्ग- २३

AI अयोध्याकाण्ड सर्ग- २३ यह महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित संस्कृत का महाकाव्य और स्मृति का एक अंग है। और पापो का नाश कराने वाले श्रीरामचन्द्र जी के जीवन की गाथा है।

और अधिक पढ़ें

वाल्मीकी रामायण- AI बालकाण्ड सर्ग- ७७

AI बालकाण्ड सर्ग- ७७ यह महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित संस्कृत का महाकाव्य और स्मृति का एक अंग है। और पापो का नाश कराने वाले श्रीरामचन्द्र जी के जीवन की गाथा है।

और अधिक पढ़ें

वाल्मीकी रामायण- AI बालकाण्ड सर्ग- ७६

AI बालकाण्ड सर्ग- ७६ यह महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित संस्कृत का महाकाव्य और स्मृति का एक अंग है। और पापो का नाश कराने वाले श्रीरामचन्द्र जी के जीवन की गाथा है।

और अधिक पढ़ें

वाल्मीकी रामायण- AI बालकाण्ड सर्ग- ७५

AI बालकाण्ड सर्ग- ७५ यह महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित संस्कृत का महाकाव्य और स्मृति का एक अंग है। और पापो का नाश कराने वाले श्रीरामचन्द्र जी के जीवन की गाथा है।

और अधिक पढ़ें

वाल्मीकी रामायण- AI बालकाण्ड सर्ग- ७४

AI बालकाण्ड सर्ग- ७४ यह महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित संस्कृत का महाकाव्य और स्मृति का एक अंग है। और पापो का नाश कराने वाले श्रीरामचन्द्र जी के जीवन की गाथा है।

और अधिक पढ़ें

वाल्मीकी रामायण- AI बालकाण्ड सर्ग- ७३

AI बालकाण्ड सर्ग- ७३ यह महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित संस्कृत का महाकाव्य और स्मृति का एक अंग है। और पापो का नाश कराने वाले श्रीरामचन्द्र जी के जीवन की गाथा है।

और अधिक पढ़ें