वाल्मीकि रामायण- अयोध्याकाण्ड सर्ग- ४६
अयोध्याकाण्ड सर्ग- ४६ महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित संस्कृत का महाकाव्य और स्मृति का एक अंग है। और पापो का नाश कराने वाले श्रीरामचन्द्र जी के जीवन की गाथा है।
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अयोध्याकाण्ड सर्ग- ४६ महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित संस्कृत का महाकाव्य और स्मृति का एक अंग है। और पापो का नाश कराने वाले श्रीरामचन्द्र जी के जीवन की गाथा है।
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और अधिक पढ़ेंजब पितरों की कृपा किसी घर पर होती है, तो जीवन में कुछ सकारात्मक संकेत दिखाई देने लगते हैं। उनकी शुभ ऊर्जा और आशीर्वाद परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और उन्नति से जुड़े माने जाते हैं।
और अधिक पढ़ेंपीपल के पेड़ को अत्यंत पवित्र और देवतुल्य माना गया है। शनिवार को पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाने से शनि दोष शांत होता है, घर में सुख-शांति आती है और भगवान की कृपा प्राप्त होती है।
और अधिक पढ़ेंआप पर्स में भूलकर भी न रखें ये चीजें: बहुत से लोग अनजाने में अपने पर्स में ऐसी चीजें रख लेते हैं जिन्हें वास्तु और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अशुभ माना जाता है। माना जाता है कि इससे धन हानि, मानसिक तनाव और आर्थिक परेशानियां बढ़ सकती हैं।
और अधिक पढ़ेंजब किसी इंसान की मृत्यु होती है, तो मृत्यु के बाद मृतक की आत्मा तुरंत और पूरी तरह से इस दुनिया से नहीं जाती। कई दिनों तक, मृतक की आत्मा अपने परिवार और घर के आस-पास ही घूमती रहती है।
और अधिक पढ़ेंसनातन धर्म और वास्तु शास्त्र में घर की ऊर्जा का विशेष महत्व बताया गया है। माना जाता है कि घर में होने वाली कुछ घटनाएं भविष्य के शुभ या अशुभ संकेत दे सकती हैं। कई बार हम इन्हें सामान्य बात समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन…
और अधिक पढ़ेंभारतीय संस्कृति और सनातन धर्म में पूजा घर को घर का सबसे पवित्र स्थान माना जाता है। यह केवल भगवान की मूर्तियां रखने की जगह नहीं, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा, शांति और आध्यात्मिकता का केंद्र माना जाता है।
और अधिक पढ़ेंकहा जाता है कि सुबह उठते ही व्यक्ति का मन और ऊर्जा जिस दिशा में जाती है, उसका प्रभाव पूरे दिन पर पड़ सकता है। इसी कारण पुराने समय से कुछ ऐसी चीजों को सुबह उठते ही देखने से मना किया गया है,
और अधिक पढ़ेंमाथे पर तिलक लगाने का महत्व केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा, मानसिक शांति, सकारात्मक सोच और भारतीय संस्कृति से जुड़ी एक महत्वपूर्ण परंपरा है। इसके…
और अधिक पढ़ेंभगवान समय-समय पर अपने भक्तों को कुछ शुभ संकेत देते हैं। घर में ये 5 संकेत बताते हैं कि घर में सकारात्मक ऊर्जा, सुख-समृद्धि और ईश्वर की कृपा बनी हुई है। भगवान की कृपा..
और अधिक पढ़ेंआखिर 40 दिन मंत्र जाप करने से क्या होता है? क्या इसके पीछे कोई धार्मिक कारण है, या यह केवल आस्था का विषय है? आइए इसे धार्मिक, आध्यात्मिक, मानसिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से विस्तार से समझते हैं।
और अधिक पढ़ेंरोज हनुमान चालीसा का पाठ करने से जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं और मानसिक, आध्यात्मिक तथा भावनात्मक शक्ति प्राप्त होती है। नकारात्मक विचार कम होने लगते हैं। और साथ ही साथ…
और अधिक पढ़ेंकुछ कार्य विशेष दिनों में नहीं करने चाहिए। इन्हीं मान्यताओं में से एक है- शनिवार के दिन बाल कटवाना। अक्सर घर के बड़े-बुजुर्ग कहते हैं कि शनिवार को बाल नहीं कटवाने चाहिए, क्योंकि इससे अशुभ प्रभाव पड़ सकता है।
और अधिक पढ़ेंसनातन धर्म में दिन और रात को अलग-अलग ऊर्जाओं का समय माना गया है। दिन का समय देवताओं की उपासना और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है, जबकि रात को विश्राम और शांत ऊर्जा का समय बताया गया है। रात में मंदिर जाने से…
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और अधिक पढ़ेंअयोध्याकाण्ड सर्ग- ४२ राजा दशरथ का पृथ्वी पर गिरना, श्रीराम के लिये विलाप करना, कैकेयी को अपने पास आने से मना करना और उसे त्याग देना। महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित संस्कृत का महाकाव्य और स्मृति का एक अंग है। और पापो का नाश कराने वाले श्रीरामचन्द्र जी के जीवन की गाथा है।
और अधिक पढ़ेंअयोध्याकाण्ड सर्ग- ४१ श्रीराम के वनगमन से रनवास की स्त्रियों का विलाप तथा नगरनिवासियों की शोकाकुल अवस्था। महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित संस्कृत का महाकाव्य और स्मृति का एक अंग है। और पापो का नाश कराने वाले श्रीरामचन्द्र जी के जीवन की गाथा है।
और अधिक पढ़ेंअयोध्याकाण्ड सर्ग- ४० सीता, राम और लक्ष्मण का दशरथ की परिक्रमा करके कौसल्या आदि को प्रणाम करना, सीतासहित श्रीराम और लक्ष्मण का रथमें बैठकर वन की ओर प्रस्थान। महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित संस्कृत का महाकाव्य और स्मृति का एक अंग है।
और अधिक पढ़ेंअयोध्याकाण्ड सर्ग- ३९ राजा दशरथ का विलाप,कौसल्या का सीता को पतिसेवा का उपदेश, सीता के द्वारा उसकी स्वीकृति। महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित संस्कृत का महाकाव्य और स्मृति का एक अंग है। और पापो का नाश कराने वाले श्रीरामचन्द्र जी के जीवन की गाथा है।
और अधिक पढ़ेंअयोध्याकाण्ड सर्ग- ३८ राजा दशरथ का सीता को वल्कल धारण कराना अनुचित बताकर कैकेयी को फटकारना और श्रीराम का उनसे कौसल्या पर कृपादृष्टि रखने के लिये अनुरोध करना।
और अधिक पढ़ेंअयोध्याकाण्ड सर्ग- ३७ श्रीराम आदि का वल्कल-वस्त्र-धारण, गुरु वसिष्ठ का कैकेयी को फटकारते हुए सीता के वल्कलधारण का अनौचित्य बताना।
और अधिक पढ़ेंअयोध्याकाण्ड सर्ग- ३६ दशरथ का श्रीराम के साथ सेना और खजाना भेजने का आदेश, कैकेयी द्वारा इसका विरोध, राजा का श्रीराम के साथ जाने की इच्छा प्रकट करना।
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