निलावंती एक श्रापित ग्रंथ संपूर्ण कथा- 1

निलावंती एक श्रापित ग्रंथ

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निलावंती एक श्रापित ग्रंथ

निलावंती एक श्रापित ग्रंथ

दोस्तों यह बहुत समय पहले की बात है। उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव में एक गरीब आदमी था, उसकी पत्नी और एक छोटी सी बच्ची थी। जब वह बच्ची पाँच वर्ष की हुई तो उसकी माँ की मृत्यु हो गई। उस लड़की का नाम निलावंती था। निलावंती की मां की मृत्यु के बाद निलावंती के पिता उस गांव को छोड़कर दूसरे गांव में चले गए। निलावंती के पिता को आयुर्वेद का बहुत ज्ञान था। निलावंती भी अपने पिता से आयुर्वेद का ज्ञान लेती थी।

निलावंती के अंदर एक विशेषता थी कि वह सभी पेड़ों, जानवरों, जानवरों और पक्षियों की भाषा को समझती थी। यही नहीं, निलावंती के सपने में शैतान भी आते थे और निलावंती को जमीन के नीचे दबी धन की जानकारी देते थे, लेकिन निलावंती के अंदर उसके पिता के अच्छे संस्कार थे, इसीलिए सब कुछ जानते हुए भी उसने जमीन के नीचे से कुछ नहीं खोदा और ना ही किसी को बताती थी। शैतान निलावंती को जो भी मंत्र बताते वह उसे पीपल के पत्तों से बनी किताब पर लिख लेती थी।

एक शापित यक्षिणी

जब निलावंती 20 से 22 साल की हो गई, तब निलावंती के सपने में आने वाले भूत हकीकत में सामने आने लगे। कुछ समय बाद निलावंती को पता चलता है कि वह एक शापित यक्षिणी है जो एक श्राप के कारण इस संसार से बाहर नहीं निकल पा रही है, उसे अपनी दुनिया में जाना था। वह यह सब अपने पिता को बताती है। तब उसके पिता उससे कहते हैं कि बेटी, अगर तुम इस दुनिया की नहीं हो और तुम इस दुनिया में किसी शाप की वजह से फंसी हो, तो मैं तुम्हें नहीं रोकूंगा, इसलिए तुम यहां से स्वेच्छा से जा सकती हो। फिर निलावन्ती उस गाँव को छोड़कर जाने लगी कि रास्ते में एक व्यापारी से उसकी मुलाकात होती है, इसलिए निलावंती उस व्यापारी से दूसरे गाँव में ले जाने को कहती है क्योंकि निलावंती को एक अच्छी आत्मा ने कहा गया था कि यहाँ से 35 मील की दूरी पर आपको एक गाँव मिलेगा और उस गाँव में एक बरगद का पेड़ मिलेगा।

और वही से तुम्हे अपनी दुनिया मे जाने का रास्ता मिलेगा इसके अलावा तुम्हे अपने रक्त के साथ-साथ पशु पक्षियों की भी बली देनी होगी। इसी को ध्यान में रखते हुये वह निलावंती उस व्यापारी से उस गाँव मे चलने के लिये कहती है। वह व्यापारी निलावंती को देखकर मंत्रमुग्ध हो जाता है और कहता है कि मैं तुम्हें उस गाँव मे ले जाउंगा लेकिन बदले में तुम्हे मुझसे शादी करनी पडेगी। निलावंती ने व्यापारी के सामने मुसकराते हुये कहा कि ठीक है मुझे मंजूर है लेकिन मेरी एक शर्त है कि रात के समय मै तुम्हारे साथ नही रहूँगी मै कहा जाती हूँ क्या करती हूँ इसके बारे मे तुम मुझसे कुछ नही पूछोगे। व्यापारी ने कहा कि ठीक है मुझे मंजूर है। उसके बाद वह व्यापारी निलावंती को अपने बैलगाड़ी में बिठाकर उस गाँव मे ले गया।

निलावंती का विवाह और तंत्रसाधना

फिर शर्त के अनुसार निलावंती ने उस व्यपारी से विवाह कर लिया। रात के समय निलावंती प्रतिदिन बरगद के पेड के नीचे तंत्रमंत्र करने के लिये चली जाती थी वहाँ पर वो अपना रक्त और पशु पक्षियों की बली भी चढाती थी। एक दिन रात के समय जब निलावंती तंत्रमंत्र उस बरगद के पेड के नीचे कर रही थी उसी समय उस गाँव के कुछ लोग निलावंती को पशु पक्षियों की बली देते हुये देख लेते है और उस व्यापारी को जाकर सारी घटना की जानकारी देते है। जब अगली रात को निलावंती अपने समय के अनुसार रात मे तंत्रसाधना के लिये निकलती है तो उसके पीछे-पीछे वह व्यापारी भी चला जाता है और निलावंती को तंत्रसाधना करते हुये देख लेता है।

अगले दिन निलावंती के स्वप्न में शैतान आता है और उससे बताता है कि निलावंती कल जब तुम तंत्रसाधना के लिये बरगद के पेड के नीचे जाओगी उसी समय बरगद के पेड के बगल से जो नदी बहती है उस नदी मे तुम्हें एक लाश बहती हुई दिखाई देगी उस लाश के गले मे एक ताबीज होगा तुम्हें उसे खोल लेना है गले से ताबीज को निकालने के बाद उसी नदी में तुम्हे एक नाव पर सवार आदमी मिलेगा तुम्हें इस ताबीज को उस आदमी को दे देना है वह तुम्हें दूसरी दुनिया के दरवाजे तक पहुंचाने में तुम्हारी मदद करेगा। उस शैतान ने निलावंती से यह भी कहा कि तुम्हे अपनी दुनिया मे वापस लौटने का सिर्फ यही एक ही चांस मिलेगा दोबारा चांस तुम्हें नही मिलेगा।

निलावंती के पति का शैतानी रूप में आना

अगले दिन निलावंती बहुत खुश हुई और रात के समय बरगद के पेड के नीचे चली गई। वह तंत्र साधना करके अपनी रक्त की तथा पशु पक्षी की बली दे ही रही थी कि उसे नदी के किनारे एक लाश बहती हुई दिखाई देती है। निलावंती उस लाश के पास जाती है और उसके गले मे बधे हुये ताबीज को निकालने की कोशिश करती है। उसी समय वहाँ पर वह व्यापारी भी आ गया जो अपने असली शैतानी रूप में आ गया था। वह ताबीज की पहली गाँठ खोल पाई थी दूसरा खोलने ही वाली थी कि गाँव वाले वहाँ आ गये और निलावंती को नरभक्षी समझकर कहने लगे कि ये दोनो शैतान है ये दोनो तो सभी गाँव वालो को मार डालेंगे अतः इन दोनो को मार डालो।

सभी गाँव वालो ने अपने-अपने हथियार लेकर दोनो को दौडा लिया निलावंती तो बच गई लेकिन गाँव वालो ने उस राक्षस को मार गिराया। राक्षस होने की वजह से वह दोबारा जीवित हो उडा और निलावंती के पास आकर बोला कि तुम मुझे ये किताब दे दो जिसमे तुमने मंत्रो को लिखा है और मुझे कुछ नही चाहिये। तब निलावंती ने सोचा कि यदि यह किताब इस शैतान को मिल गया तो यह दुनिया के लिये अनर्थ साबित हो सकता है।

निलावंती का किताब को श्रापित करना

अतः निलावंती ने उस किताब को श्रापित करते हुये कहा कि:

अहं नीलवन्तिः शापितः यक्षिणी भगवान् शिवः मम साक्षीरूपेण, एतत् पुस्तकं शापयामि यत् यः लोभेन एतत् पुस्तकं सम्पूर्णतया पठति सः तत्क्षणमेव म्रियते, यः एतत् पुस्तकं पठित्वा अर्धमार्गे त्यजति सः उन्मत्तः भविष्यति।

जिसने लालच में आकर इस किताब को पूरा पढ़ लिया उसकी तुरंत मृत्यु हो जायेगी और जिसने इस किताब को आधा पढकर बीच में ही छोड दिया वह पागल हो जायेगा। इस भयंकर श्राप के बाद निलावंती ने किताब को वही छोड़ दिया और चली गयी। निलावंती के जाने के पश्चात वह शैतान भी डर कि वजह से वहां से चला गया, और गांव वालों ने भी कभी उस किताब को नहीं छुआ। यह अभी तक कोई नहीं जानता की निलावंती कहा गयी और आगे उसके साथ क्या हुआ? यह भी कहा जाता है की आज तक निलावंती जीवित है और अपनी दुनिया में वापस जाने का मार्ग ढूंढ रही है।

आगे चल कर उस किताब के पन्ने हवा के कारण अलग-अलग दिशाओ में फैल गए थे। कुछ समय पश्चात वहां कुछ साधु आये और उन्होंने उन पन्नो को जोड़ कर इस महान किताब को समझा। फिर उनमे से एक अच्छा साधु था, जिनके मन में बिलकुल भी लालच नहीं थी। उन्होंने संपूर्ण किताब को पढ़ कर इसका सरल अनुवाद करने का सोचा। साधु जी ने बिलकुल ऐसा ही किया, इस किताब को लोक कल्याण के लिए वापस अनुवादित में बनाया। लेकिन बहुत से लोगो ने इसका अपनी लालच पूर्ण करने के लिए ही उपयोग किया। जिसके कारण अधिकतर लोगो के लिए किताब लाभकारी नहीं रही। अब आज के दिन ये किताब कहा है यह किसी को पाता नहीं।

नोट:- यदि आपने यह लेख यहाॅ॑ तक पढ़ा है इसका अर्थ है कि आप इसे एक निस्वार्थ भाव से पढ़ रहे है। यह एक शापित ग्रंथ है परंतु निस्वार्थभाव से पढ़ने वाले मनुष्य को इसका कोई भी दुष्प्रभाव नहीं पड़ता कृपया इसकी आगे की कथा भी आपने निस्वार्थभाव से ही पढ़े यह आपके लिए आवश्यक है।

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