श्री शालिग्राम पूजन विधि और मंत्र संस्कृत में भावार्थ सहित

श्री शालिग्राम साक्षात सत्यनारायण भगवान हैं, नारायण स्वरूप हैं। इसलिये इसमें प्राण-प्रतिष्ठा आदि संस्कारों की आवश्यकता नहीं होती। जहाँ शालिग्राम-शिला होती है, वहाँ सभी तीर्थ और भुक्ति-मुक्ति का वास होता है। शालिग्राम का चरणोदक सभी तीर्थों से अधिक पवित्र माना गया है।

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उँगलियों पर जप गिनने की प्राचीन भारतीय विधि

उँगलियों पर जप गिनने की प्राचीन भारतीय विधि को दर्शाता है, जिसे “करमाला जप विधि” या अंगुली-जप पद्धति कहा जाता है। इसका उपयोग विशेषकर गायत्री मंत्र, शक्ति मंत्र और वैदिक जप में किया जाता है।

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गौरी और गणेश पूजन विधि और मंत्र संस्कृत में

गौरी और गणेश पूजन- गणपति (विघ्नहर्ता) और माता गौरी (शक्ति व सौभाग्य की देवी) का संयुक्त पूजन
शुभारंभ, बुद्धि, सुख-समृद्धि, गृहशांति और मंगलकामना के लिए किया जाता है।
किसी भी शुभ कार्य से पहले गणपति पूजन अनिवार्य माना गया है।

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श्री महाकाली षोड़शोपचार पूजन विधि एवं साधना मंत्र

श्री महाकाली की साधना समस्त साधनावों में से सर्वोत्तम साधना है और अति जटिल व कठिन साधना है, यह महान साधना करने के पश्चात् साधक समस्त कामनावों की पूर्ति करने में सक्षम हो जाता है।

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श्री महालक्ष्मी पूजन विधि और मंत्र संस्कृत में

श्री महालक्ष्मी पूजन से धन-समृद्धि, स्वास्थ्य, सुख, सौभाग्य, और जीवन की बाधाओं से मुक्ति मिलती है; यह पूजा आर्थिक स्थिरता, करियर में उन्नति और घर में सकारात्मक ऊर्जा व वैभव लाती है, जिससे व्यक्ति को भौतिक और आध्यात्मिक दोनों तरह की समृद्धि प्राप्त होती है।

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जीवात्मा का कर्म लोक की यात्रा, शिव का उपदेश और श्राप

इस त्रिलोक में समस्त जीवात्मा शिव का ही अंश हैं। क्योंकि देव या मनुष्य अपने प्रयासों से जो नहीं कर सकते, वह भगवान शिव अपनी कृपा से कर सकते हैं।
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हिन्दू धर्म में 108 का इतना महत्व क्यों हैं?

卐 मुख पृष्ठ108 का महत्व 卐 108 का महत्व सनातन धर्म और ज्योतिष में नंबरों का खास महत्व है। इन

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कैसे अभी भी मैं हिन्दू हूॅं | Still I Am Hindu

दोस्तों क्या आपने कभी सोचा है कि आप अभी तक या यूं कहे पैदाइशी हिन्दू ही क्यों हैं। जबकि हमारे देश में अनेकों वर्ष मुगलों ने और अनेकों बर्ष अंग्रेजों ने शासन किया, और अब इस्लामिक कंट्टरपंथी, ईसाई मिशनरीयों ने उत्पाद मचा रखा है।

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आओ चलें महाकुम्भ – एक ऐसी दुनिया जो मोक्ष का मार्ग है।

महाकुम्भ आस्था, विश्वास, सौहार्द एवं संस्कृतियों के मिलन का पर्व है “महाकुम्भ”। ज्ञान, चेतना और उसका परस्पर मंथन कुम्भ मेले का वो आयाम है जो आदि काल से ही हिन्दू धर्मावलम्बियों की जागृत चेतना को बिना किसी आमन्त्रण के खींच कर ले आता है।

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पुंसवन संस्कार या गर्भाधान संस्कार और नियम

गर्भस्थ शिशु के समुचित विकास के लिए यह संस्कार किया जाता है। गर्भाधान संस्कार का लोप ही हो गया है, गर्भाधान का प्रचलन कठिन पड़ता है। गर्भ सुनिश्चित हो जाने पर तीन माह पूरे हो जाने पर यह संस्कार किया जाता है।

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मुण्डन या चूडाकर्म संस्कार

इस संस्कार में शिशु के सिर के बाल पहली बार उतारे जाते हैं। लौकिक रीति यह प्रचलित है कि मुण्डन, बालक की आयु एक वर्ष की होने तक करा लें अथवा दो वर्ष पूरा होने पर तीसरे वर्ष में कराएँ।

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नामकरण संस्कार | Namakaran Sanskar

नामकरण संस्कार शिशु जन्म के बाद पहला संस्कार कहा जा सकता है। इस संस्कार के माध्यम से शिशु रूप में अवतरित जीवात्मा को कल्याणकारी यज्ञीय वातावरण का लाभ पहुँचाने का सत्प्रयास किया जाता है।

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कलश स्थापना, पूजन विधि और मंत्र

कलश स्थापना और पूजन लगभग हर अनुष्ठान में किया जाता है। सामान्य रूप से कलश को पहले से तैयार रखा जाता है और पूजन क्रम के दौरान इसकी पूजा की जाती है।

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Go And Get Your MNSGranth Certificate Now

इस सर्टिफिकेट का उद्देश्य केवल व्यक्ति विशेष को उसके कठोर परिश्रम के फल और खुशियों के पल को जीवित रखना है। कि किस प्रकार उसने नियमित रूप से पाठ करते हुए यह सर्टिफिकेट प्राप्त किया है।

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क्षमायाचना मंत्र

क्षमायाचना मंत्र कई बार हम जाने-अनजाने में ऐसी गलतियां कर देते हैं जिनके विषय में हमें पता नहीं होता। जब तक आपको इस बात का पता चलता है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।

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सही और शुद्ध स्वस्तिक बनाने की सात्विक विधि

स्वस्तिक शब्द सु+अस+क से लिया गया है। ‘सु’ का अर्थ है अच्छा, ‘अस’ का ‘सत्ता’ या ‘अस्तित्व’ और ‘क’ का ‘कर्त्ता’ या करने वाले से है। ‘अच्छा’ या ‘मंगल’ करने वाला।

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निलावंती एक श्रापित ग्रंथ संपूर्ण कथा- 7

निलावंती को भगवान शिव के गणो में शामिल होने के लिये आवश्यक तावीज तो मिल गया था लेकिन उसने सोचा की वह जाने से पहले आज तक उसने जितना ज्ञान इकट्ठा किया है उसकी विरासत ग्रंथ के रूप में पीछे छोड़ना चाहती थी।

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निलावंती एक श्रापित ग्रंथ संपूर्ण कथा- 6

निलावंतीपहली बार पिलाया जाने वाला पानी जंगल में रख कर जब सभी पशु, पक्षी, जानवर पी ले तो उसका एक घूँट बच्चे को उन सभी जानवरों की भाषा का ज्ञानी बनायेगा जिन्होंने वह पानी पिया है।

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निलावंती एक श्रापित ग्रंथ संपूर्ण कथा- 5

निलावंती रावसाहेब और बाबु दोनों ही मूर्ति के पास पहुँचे और सोचने लगे की अब आगे क्या? तभी मूर्ति जिसकी पीठ इनकी तरफ थी वह अपना सर इनकी तरफ घुमाने लगी। दोनों ही डर से काँपने लगे उन्हें समझ आया की क्यों बाजिद की खोज में आया हर इंसान मरा हुआ पाया गया था।

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निलावंती एक श्रापित ग्रंथ संपूर्ण कथा- 4

निलावंती अमावस की रात जैसे जैसे करीब आने लगीं वैसे वैसे कन्नम मुझे किसी बच्चे को लाने के लिये पीछे पड़ गया। मैंने भी कह दिया की मैं एक बच्चे को चुन चुका हूँ और बड़ी आसानी से मैं अमावस को उसे वहाँ लाऊँगा

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निलावंती एक श्रापित ग्रंथ संपूर्ण कथा- 3

मैं चाहता था की बीवी को चिल्लाकर उठा दूं और भाग जाने के लिये कहुँ। लेकिन मैं कुछ नहीं कर पाया। मैंने धीरे से छुरा और खोपड़ी बगल में रख दी अब मेरे हाथ बहुत सफाई से बीवी का गला घोट रहे थे। मेरी अभागी बीवी को आँखें खोलने तक का मौका नहीं मिला।

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निलावंती एक श्रापित ग्रंथ संपूर्ण कथा- 2

मुख पृष्ठनिलावंती एक श्रापित ग्रंथकथा- 2 निलावंती एक श्रापित ग्रंथ निलावंती के विषय में और एक बात प्रसिद्ध थी की

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निलावंती एक श्रापित ग्रंथ संपूर्ण कथा- 1

मुख पृष्ठनिलावंती एक श्रापित ग्रंथकथा- 1 निलावंती एक श्रापित ग्रंथ दोस्तों यह बहुत समय पहले की बात है। उत्तर प्रदेश

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कभी गोपाला तो कभी नंदलाला पढ़ना न भूले श्री कृष्णा के 108 नाम

दोस्तों जन्माष्टमी के दिन भगवान श्री कृष्णा के 108 नामों का जाप करने से भगवान बहुत जल्द प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं जल्द ही पूरी करते हैं।

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