ऋग्वेद

ऋग्वेद मे ईश्वर के विभिन्न नाम-रूपों- अग्नि, इन्द्र, सूर्य, वरुण, वायु आदि की स्तुति का वर्णन।

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ऋग्वेद संस्कृत में “रिक” शब्द से बना हुआ है, जिसका अर्थ होता है “स्तुति” या “प्रशंसा।” यह चार वेदों में से एक है, जिनमें अन्य तीन हैं: सामवेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद। यह एक प्राचीन संस्कृत भाषा का धार्मिक ग्रंथ है, जो वेदांतीय साहित्य का पहला और सबसे प्राचीन भाग है। यह भारतीय धर्म, संस्कृति और संस्कृत भाषा के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने वाला एक मौलिक ग्रंथ है।

ऋग्वेद को वेदों का प्रथम संहिता माना जाता है और इसके गाने या सूक्तियां मंत्रों के रूप में लिखे गए हैं। इन मंत्रों का प्रयोग धार्मिक और अनुष्ठानिक अवसरों पर किया जाता था। ऋग्वेद के मंत्रों की भाषा वैदिक संस्कृत है, जो आधुनिक संस्कृत से थोड़ी अलग है। ऋग्वेद के संग्रह में दस मंडल होते हैं और इनमें लगभग 1028 सूक्तियां होती हैं। प्रत्येक सूक्ति छन्दों में लिखी होती है और उन्हें ऋषि ने रचा था। यहां ऋषि शब्द से संदर्भित है, जो ध्यान और धार्मिक अनुभव में आनंद प्राप्त करने वाले व्यक्ति का उद्घोषण करता है।

यह वेद मुख्य रूप से दो भागों में विभाजित होता है – पूर्वार्ध (बुक 1 से 7 तक) और उत्तरार्ध (बुक 8 से 10 तक)। ऋग्वेद में ब्रह्मन, अरण्यक, और उपनिषद जैसी अन्य वेदांतिक साहित्यिक शृंगार भाष्यकारों का समावेश नहीं होता है, इसलिए यह ब्राह्मणाध्यायी वेद के भी आधार है। ऋग्वेद में भगवान द्वारा पृथ्वी पर प्रकट होने वाली अपरिमित शक्तियों, प्राकृतिक विज्ञान, समाज, संस्कृति, धर्म, राजनीति और विज्ञान की विभिन्न पहलुओं का वर्णन है।

यह वेद मन्त्रों और ऋकों के समृद्ध संग्रह है, जिन्हें पूर्व में विशिष्ट उच्चारण के साथ छंदों में संगठित किया जाता था और इन्हें धार्मिक अनुष्ठानों में उपयोग किया जाता था। ऋग्वेद भारतीय उपमहाद्वीप की संस्कृति और परंपराओं के मूलभूत स्तम्भ के रूप में माना जाता है और यह हिंदू धर्म का एक प्रमुख आधार है। यह विश्व के एक प्राचीनतम धर्मग्रंथों में से एक है और भारतीय धर्म, भाषा, साहित्य और संस्कृति का अद्भुत स्रोत है।

ऋग्वेद को ऋषियों द्वारा सम्पूर्ण किए गए ब्रह्मा के शब्दों का संग्रह माना जाता है। यह मुख्य रूप से सृष्टि, प्रकृति, भगवानों की प्रशंसा और विधियों के बारे में विचार करता है। इसमें कुल 10,552 मंत्र हैं, जिन्हें 10 मण्डलों में व्यवस्थित किया गया है। ऋग्वेद के अनुवाद के लिए कई भाषाएँ और टिप्पणी संस्करण उपलब्ध हैं, जिनमें से कुछ प्रसिद्ध अनुवादक हैं। इसमें से दयानंद सरस्वती, रालो देव, ग्रिफिथ आदि के अनुवाद प्रसिद्ध हैं। यहाँ आप हिन्दी भाषा मे पढ़ सकते है।

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