श्री वैद्यनाथ कथा| What Is The Full Story Of Shri Vaidyanath

वैद्यों के नाथ श्री वैद्यनाथ कथा

श्री वैद्यनाथ

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श्री वैद्यनाथ

श्री वैद्यनाथ की कथा

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कोटि रुद्र संहिता के अनुसार कथा

श्री शिव महापुराण के कोटि रुद्र संहिता में श्री वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग को शिव के 12 ज्योतिर्लिंगो मे से नौवां ज्योतिर्लिंग माना गया है। जो मनुष्य इस ज्योतिर्लिंग का दर्शन करता है, उसे अपने समस्त पापों से छुटकारा मिल जाता है।

रावण की कठोर तपस्या

शास्त्रो और पौराणिक मान्यता के अनुसार इस ज्योतिर्लिंग का संबंध रावण से है। रावण भगवान शिव का परम भक्त था। राक्षसराज रावण अभिमानी तो था ही, वह अपने अहंकार को भी शीघ्र प्रकट करने वाला था। एक बार वह भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए हिमालय पर कठोर तपस्या कर रहा था।

उसने एक-एक करके अपने 9 सिरों को काटकर शिवलिंग पर चढ़ा दिया। जब वह अपना 10 वां सिर काट करके चढ़ाने जा रहा था, तब भगवान्‌ शिव अतिप्रसन्न और संतुष्ट होकर उसके समक्ष प्रकट हो गए। शीश काटने को उद्यत रावण का हाथ पकड़कर उन्होंने उसे ऐसा करने से रोक दिया। उसके नौ सिर भी पहले की तरह जोड़ दिए और अत्यंत प्रसन्न होकर उससे वर मांगने को कहा।

शिवलिंग को लंका ले जाना

रावण ने वर के रूप में भगवान शिव से उस शिवलिंग को अपनी राजधानी लंका में ले जाने की अनुमति मांगी। भगवान्‌ शिव ने उसे यह वरदान तो दे दिया लेकिन एक शर्त भी उसके साथ लगा दी। उन्होंने कहा, तुम शिवलिंग ले जा सकते हो किंतु यदि रास्ते में इसे कहीं रख दोगे तो यह वहीं अचल हो जाएगा, तुम फिर इसे उठा न सकोगे। रावण इस बात को स्वीकार कर उस शिवलिंग को उठाकर लंका के लिए चल पड़ा।

प्रसन्नोभव देवेश लंकां च त्वां नयाम्यहम् ।
सफलं कुरू मे कामं त्वामहं शरणं गत: ॥
इत्युक्तश्च तदा तेन शम्भुर्वै रावणेन स: ।
प्रत्युवाच विचेतस्क: संकटं परमं गत: ॥
श्रूयतां राक्षसश्रेष्ठ वचो मे सारवत्तया ।
नीयतां स्वगृहे मे हि सदभक्त्या लिंगमुत्तमम् ॥
भूमौ लिंगं यदा त्वं च स्थापयिष्यसि यत्र वै ।
स्थास्यत्यत्र न सन्देहो यथेच्छसि तथा कुरू ॥

भगवान विष्णु का लीला रचना

शिव जी की इस बात को सुनकर सभी देवी-देवता चिंतित हो गए। सभी इस समस्या को दूर करने के लिए भगवान विष्णु के पास पहुंच गए। भगवान विष्णु ने इस समस्या के समाधान के लिए एक लीला रची। उन्होंने वरुण देव को आचमन करने रावण के पेट में जाने का आदेश दिया। इस वजह से रावण को देवघर के पास लघुशंका लग गई। रावण को समझ नहीं आया क्या करे, तभी उसे बैजू नाम का ग्वाला दिखाई दिया। रावण ने बैजू को शिवलिंग पकड़ाकर लघुशंका करने चला गया।

रावण का शिवलिंग को उखाड़ना

वरुण देव की वजह से रावण कई घंटों तक लघुशंका करता रहा। बैजू रूप में भगवान विष्णु ने मौके का फायदा उठाते हुए शिवलिंग वहीं रख दिया। वह शिवलिंग वहीं स्थापित हो गया। वापस आकर रावण ने काफ़ी ज़ोर लगाकर उस शिवलिंग को उखाड़ना चाहा, किन्तु वह असफल रहा। इस वजह से इस जगह का नाम बैजनाथ धाम पड़ गया। हालांकि इसे रावणेश्वर धाम के नाम से भी जाना जाता है।

श्री वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग की महिमा

यह श्री वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग अनंत फलों को देने वाला है। यह ग्यारह अंगुल ऊँचा है। इसके ऊपर अँगूठे के आकार का ग़ड्डा है। कहा जाता है कि यह वहीं निशान है जिसे रावण ने अपने अँगूठे से बनाया था। यहां दूर-दूर से तीर्थों का जल लाकर चढ़ाने का विधान है। रोग-मुक्ति के लिए भी इस ज्योतिर्लिंग की महिमा बहुत प्रसिद्ध है।

इधर ब्रह्मा, विष्णु इन्द्र आदि देवताओं ने वहाँ पहुँच कर उस शिवलिंग की विधिवत पूजा की। उन्होंने शिव जी का दर्शन किया और लिंग की प्रतिष्ठा करके स्तुति की। उसके बाद वे स्वर्गलोक को चले गये।

तस्मिँल्लिंगे स्थिते तत्र सर्वलोकहिताय वै ।
रावण: स्वगृहं गत्वा वरं प्राप्य महोत्तमम् ॥
तच्छुत्वा सकला देवा: शक्राद्या मुनयस्तथा ।
परस्परं समामन्त्र्य शिवसक्तधियोऽमला: ॥
तस्मिन् काले सुरा: सर्वे हरिब्रह्मदयो मुने ।
आजग्मुस्तत्र सुप्रीत्या पूजां चक्रुर्विशेषत: ॥
प्रत्यक्षं तं तदा दृष्टवा प्रतिष्ठाप्य च ते सुरा: ।
वैद्यनाथेति संप्रोच्य नत्वा – नत्वा दिवं ययु: ॥

ज्योतिर्लिंग का दर्शन करने का लाभ

पुराणों में बताया गया है कि जो मनुष्य इस ज्योतिर्लिंग का दर्शन करता है, उसे अपने समस्त पापों से छुटकारा मिल जाता है। उस पर भगवान्‌ शिव की कृपा सदा बनी रहती है। दैहिक, दैविक, भौतिक कष्ट उसके पास भूलकर भी नहीं आते भगवान्‌ शंकर की कृपा से वह सारी बाधाओं, समस्त रोगों-शोकों से छुटकारा पा जाता है। उसे परम शांतिदायक शिवधाम की प्राप्ति होती है।

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श्री वैद्यनाथ FAQ?

श्री वैद्यनाथ की कहानी क्या है?

श्री वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग का संबंध रावण से है। रावण भगवान शिव का परम भक्त था। एक बार वह भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए हिमालय पर कठोर तपस्या कर रहा था। विस्तार पूर्वक पढ़े..

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श्री वैद्यनाथ का रहस्य क्या है?

पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक ऐसा माना जाता है कि बैद्यनाथ धाम की स्थापना खुद भगवान विष्णु ने की थी। साथ ही यह भी मान्यता है कि इस मंदिर में आने वाले सभी भक्तों की इच्छा पूर्ण होती है। विस्तार पूर्वक पढ़े..

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श्री वैद्यनाथ धाम की उत्पत्ति कैसे हुई?

वरुण देव की वजह से रावण कई घंटों तक लघुशंका करता रहा। बैजू रूप में भगवान विष्णु ने मौके का फायदा उठाते हुए शिवलिंग वहीं रख दिया। वह शिवलिंग वहीं स्थापित हो गया। इस वजह से इस जगह का नाम बैजनाथ धाम पड़ गया। विस्तार पूर्वक पढ़े..

श्री वैद्यनाथ कथा| What Is The Full Story Of Shri Vaidyanath

नौवां ज्योतिर्लिंग कौन सा है?

श्री शिव महापुराण के कोटि रुद्र संहिता में श्री वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग को शिव के 12 ज्योतिर्लिंगो मे से नौवां ज्योतिर्लिंग माना गया है। जो मनुष्य इस ज्योतिर्लिंग का दर्शन करता है, उसे अपने समस्त पापों से छुटकारा मिल जाता है। विस्तार पूर्वक पढ़े..

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