क्यों है तुलसी पूजनीय और क्या है तुलसी पूजन विधि

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तुलसी पूजन विधि व महत्व

क्यों है तुलसी पूजनीय और क्या है तुलसी पूजन विधि

दोस्तों किसी ने सही कहा है कि जो बीत गया है वो अब दौर ना आएगा। दोस्तों आप सभी जानते हैं कि एक ऐसा युग भी बीता है उस समय पृथ्वी ही क्या अपितु संपूर्ण ब्रह्मांड पर सिर्फ संतों का युग था अर्थात सतयुग या यु कहे कि सत्य का युग था। परंतु आज सेंटा का युग है, इस्लाम का युग है, असत्य का युग है, अधर्म का युग है। खैर, जैसे सबने छोड़ दिया है वैसे हम भी इसको छोड़ देते हैं।

वैसे आज हम बात कर रहे हैं 25 दिसंबर की, जिसको विश्व भर में धूम-धाम से मनाया जाता हैं।

इस बात को तो शायद सब जानते ही हैं कि 25 दिसंबर के दिन तुलसी पूजन दिवस मनाया जाता है। हिंदू धर्म में इसे पूजनीय माना गया है और आयुर्वेद में तुलसी को अमृत कहा गया है, क्योंकि ये औषधि का काम भी करती है। बता दें कि जिस घर में तुलसी का पौधा होता है, वहाँ हमेशा सुख-शांति का वास होता है। शास्त्रों के अनुसार तुलसी के पत्ते के बिना भगवान श्री हरि भोग स्वीकार नहीं करते हैं।

तुलसी पूजन का महत्व

  1. धार्मिक महत्व:
    • तुलसी को “हरि प्रिय” कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि तुलसी माता की पूजा से भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी का आशीर्वाद मिलता है।
    • तुलसी पूजन से घर में शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।
    • तुलसी विवाह (देवउठनी एकादशी) का आयोजन भगवान विष्णु के प्रति श्रद्धा प्रकट करने का विशेष अवसर है।
  2. वैज्ञानिक महत्व:
    • तुलसी का पौधा वायुमंडल को शुद्ध करता है और ऑक्सीजन छोड़ता है।
    • इसके पत्तों का सेवन करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
    • तुलसी के औषधीय गुण सर्दी, खांसी, बुखार, और अन्य बीमारियों में लाभकारी होते हैं।

तुलसी पूजन की तिथियां और समय

  1. दैनिक पूजन:
    • हर दिन सुबह और शाम तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाने की परंपरा है।
  2. विशेष दिन:
    • कार्तिक मास: यह महीना तुलसी पूजन के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
    • देवउठनी एकादशी: इस दिन तुलसी विवाह का आयोजन किया जाता है।

तुलसी पूजन विधि

1. सामग्री संग्रह:

  • जल (गंगाजल या शुद्ध पानी)
  • दीपक (घी या तेल का)
  • अगरबत्ती और धूप
  • अक्षत (चावल)
  • पुष्प (लाल या सफेद)
  • चंदन
  • तुलसी विवाह के लिए: शालिग्राम शिला, कलावा, वस्त्र, मिठाई

2. तुलसी पूजन की प्रक्रिया:

  1. तुलसी के पौधे को स्वच्छ करें:
    सुबह स्नान करने के बाद तुलसी के पौधे के पास जाएं और पौधे को जल और गंगाजल अर्पित करें।
  2. दीपक और धूप प्रज्वलित करें:
    तुलसी के पास दीपक जलाएं और अगरबत्ती या धूप अर्पित करें।
  3. चंदन और पुष्प अर्पण:
    तुलसी माता को चंदन और पुष्प अर्पित करें।
  4. मंत्र जाप:
    तुलसी पूजन के दौरान निम्न मंत्रों का जाप करें:
    • “महाप्रसादजननी सर्व सौभाग्यवर्धिनी।
      आधि व्याधि हरा नित्यं तुलसी त्वं नमोस्तुते।।”
    • “ॐ तुलस्यै विद्महे विष्णुप्रिये धीनिमहि तन्नो तुलसी प्रचोदयात्।”
    • “ॐ श्रीमहालक्ष्म्यै नमः।”
  5. तुलसी की परिक्रमा:
    तुलसी के पौधे की 3, 5 या 11 बार परिक्रमा करें। परिक्रमा करते समय “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का जाप करें।
  6. प्रसाद अर्पण:
    तुलसी माता को मिठाई या भोग अर्पित करें।
  7. विशेष पूजन (तुलसी विवाह):
    • शालिग्राम शिला (भगवान विष्णु का प्रतीक) को तुलसी के साथ विवाह करवाएं।
    • विवाह में तुलसी के पौधे को साड़ी या वस्त्र, कुमकुम, और फूलों से सजाएं।
    • विवाह की सभी विधियों का पालन करें।

तुलसी पूजन के लाभ

  1. धन और सुख-समृद्धि:
    तुलसी पूजन से घर में आर्थिक समृद्धि आती है।
  2. पारिवारिक शांति:
    घर में शांति और सौहार्द का माहौल बना रहता है।
  3. पापों का नाश:
    तुलसी पूजन से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
  4. स्वास्थ्य:
    तुलसी के औषधीय गुण शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं।

तुलसी पूजन के लिए सावधानियां

  1. तुलसी के पौधे के पास मांस-मदिरा का सेवन न करें।
  2. शाम के समय तुलसी के पौधे की पत्तियां न तोड़ें।
  3. तुलसी के पौधे को गंदा या सूखा न रखें।

तुलसी के नाम

  1. वृंदा,
  2. वृंदावनी,
  3. विश्वपावनी,
  4. विश्वपूजिता,
  5. पुष्पसारा,
  6. नंदिनी,
  7. तुलसी
  8. कृष्णजीवनी

कहते हैं कि जो व्यक्ति तुलसी की पूजा करके इस नामाष्टक का पाठ करता है, उसे अश्वमेध यज्ञ का फल प्राप्त होता है।

स्कंद पुराण के अनुसार जिस घर में तुलसी का बगीचा होता है अथवा प्रतिदिन पूजन होता है, उस गर में यमदूत प्रवेश नहीं करते। तुलसी की उपस्थिति मात्र से नकारात्मक शक्तियों एवं दुष्ट विचारों से रक्षा होती है।

गरुड पुराण के अनुसार तुलसी का वृक्ष लगाने, पालन करने, सींचने तथा ध्यान, स्पर्श और गुणगान करने से मनुष्यों के पूर्व जन्मार्जित पाप जलकर नष्ट हो जाते हैं। आज के दिन केवल तुलसी की पूजा ही नहीं होती है बल्कि एक अभियान के तहत घर-घर तुलसी का पौधा लगाया जाता है।


विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों में 25 दिसंबर का महत्व:

25 दिसंबर को विश्वभर में ईसाई धर्म के अनुयायी क्रिसमस के रूप में मनाते हैं, जो ईसा मसीह (यीशु) के जन्म का पर्व है। हालांकि, यह तिथि अन्य धर्मों और संस्कृतियों में भी विभिन्न महत्व रखती है। आइए जानते हैं विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों में 25 दिसंबर का महत्व:

1. ईसाई धर्म

  • क्रिसमस पर्व:
    यह दिन ईसा मसीह के जन्म की खुशी में मनाया जाता है।
    • चर्चों में विशेष प्रार्थना सभाएं होती हैं।
    • ईसाई समुदाय इस दिन उपहार, सजावट और दावतों के साथ खुशियां मनाता है।
    • सांता क्लॉज की परंपरा भी इस दिन के साथ जुड़ी हुई है।

2. यहूदी धर्म

  • हनुक्का (Hanukkah):
    25 दिसंबर के आसपास हनुक्का पर्व आता है।
    • यह आठ दिन तक चलने वाला प्रकाश पर्व है।
    • इसमें यहूदी समुदाय मोमबत्तियां जलाते हैं और प्रार्थना करते हैं।

3. इस्लाम धर्म

  • ईसा मसीह (इस्लाम में हज़रत ईसा) को एक महान पैगंबर माना गया है।
  • कुरान में उनकी शिक्षाओं और उनकी माता मरियम (मैरी) का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है।

4. हिंदू धर्म

  • मार्गशीर्ष पूर्णिमा:
    हिंदू पंचांग के अनुसार, दिसंबर में पड़ने वाली पूर्णिमा तिथि का महत्व होता है।
    • 25 दिसंबर के दिन तुलसी पूजन दिवस मनाया जाता है।
    • इस समय भगवान विष्णु और तुलसी माता की पूजा की जाती है।
    • इसे कुछ स्थानों पर धार्मिक अनुष्ठानों के लिए शुभ समय माना जाता है।
  • इसके अलावा, कई लोग इस दिन को अन्य धर्मों की विविधता का सम्मान करते हुए मनाते हैं।

5. बौद्ध धर्म

  • बोधि दिवस के आसपास का समय:
    बौद्ध धर्म में बोधि दिवस (गौतम बुद्ध को ज्ञान प्राप्ति का दिन) दिसंबर में मनाया जाता है।
    • हालांकि यह दिन 25 दिसंबर नहीं है, लेकिन इस समय के आसपास ध्यान और शांति के कार्यक्रम आयोजित होते हैं।

6. पगान परंपराएं

  • यूल पर्व (Yule Festival):
    प्राचीन यूरोपीय परंपराओं में 25 दिसंबर के आसपास सर्दियों का संक्रांति पर्व मनाया जाता है।
    • यह सूर्य के लौटने (दिन बड़े होने) का उत्सव है।
    • इस परंपरा के कई तत्व क्रिसमस में भी देखे जा सकते हैं, जैसे पेड़ सजाना।

7. सिख धर्म

सिख धर्म में 25 दिसंबर का कोई विशेष धार्मिक महत्व नहीं है, लेकिन:

  • इस समय कई गुरुद्वारों में लंगर और समाज सेवा के आयोजन होते हैं।
  • सिख समुदाय विविधता और भाईचारे का आदर करते हुए इस दिन को सम्मान देता है।

8. आधुनिक संदर्भ में

  • धार्मिक सहिष्णुता:
    25 दिसंबर का दिन अब विभिन्न धर्मों के बीच सहिष्णुता और प्रेम का प्रतीक बन चुका है।
  • छुट्टियों का समय:
    कई देशों में इसे परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताने का अवसर माना जाता है।

निष्कर्ष

तुलसी पूजन न केवल धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह हमारे जीवन में शांति, समृद्धि और स्वास्थ्य लाने में भी सहायक है। इसे दैनिक पूजा में शामिल करें और तुलसी माता का आशीर्वाद प्राप्त करें।

तुलसी विवाह की कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, तुलसी एक बार वृंदा नाम की एक पतिव्रता स्त्री थीं। वृंदा ने भगवान विष्णु से क्रोधित होकर श्राप दिया कि वे पत्थर (शालिग्राम) बन जाएंगे। लेकिन उनके तप और भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने तुलसी को अपने हृदय का स्थान दिया। तभी से तुलसी का विवाह शालिग्राम शिला से करने की परंपरा चली आ रही है। विस्तार पूर्वक कथा

तुलसी और विष्णु की प्रेम कथा

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