उँगलियों पर जप गिनने की प्राचीन भारतीय विधि
उँगलियों पर जप गिनने की विधि
उँगलियों पर जप गिनने की प्राचीन भारतीय विधि को दर्शाता है, जिसे “करमाला जप विधि” या अंगुली-जप पद्धति कहा जाता है। इसका उपयोग विशेषकर गायत्री मंत्र, शक्ति मंत्र और वैदिक जप में किया जाता है।
यह विधि क्यों प्रयोग की जाती है?
- वैदिक परंपरा में मान्य
- माला न होने पर भी १०८ जप संभव
- मौन जप के लिए श्रेष्ठ
- ध्यान भंग नहीं होता
- साधना गुप्त रहती है
✋ हाथों की स्थिति
- दायाँ हाथ जप के लिए
- बायाँ हाथ गिनती (सहायक) के लिए
- अंगूठे से गिनती करें
- तर्जनी का प्रयोग न करें
ऊपर के चित्र संख्या १ के अनुसार अंक १ से आरम्भ कर १० अंक तक अँगूठे से जप करने से एक करमाला होती है। इसी प्रकार दस करमाला जप करके चित्र संख्या २ के अनुसार १ अंक से आरम्भ करके ८ अंक तक जप करने से १०८ संख्या की माला होती है।
अनामिका के मध्यवाले पर्व से आरम्भ कर क्रमशः पाँचों अँगुलियों के दसों पर्व पर (अँगूठे को घुमाएं) और मध्यमा अंगूली के मूल में जो दो पर्व हैं, उन्हें मेरु मानकर उसका उल्लंघन न करे। यह गायत्री कल्प के अनुसार करमाला है, जिसका वर्णन ऊपरके चित्र में भी दिखाया गया है।
आरभ्यानामिकामध्यं पर्वाण्युक्तान्यनुक्रमात्।
तर्जनीमूलपर्यन्तं जपेद् दशसु पर्वसु॥
मध्यमाङ्गुलिमूले तु यत्पर्व द्वितयं भवेत्।
तद् वै मेरुं विजानीयाज्जपे तं नातिलङ्घयेत्॥
यह चित्र क्या बताता है?
चित्र में हाथों की उँगलियों के पर्व (जोड़) पर संख्याएँ लिखी हुई हैं।
इन संख्याओं की सहायता से माला के बिना जप की गिनती की जाती है।
✋ चित्र संख्या १ (दायाँ हाथ)
- इसमें अंगूठे से तर्जनी, मध्यमा, अनामिका और कनिष्ठा की तीन-तीन पर्वों पर क्रमशः संख्या गिनी जाती है।
- अंगूठा घूमते हुए हर पर्व को छूता है।
- इस विधि से १ से १० तक की एक करमाला (छोटी माला) पूरी होती है।
👉 मतलब: अंगूठे से उँगलियों के पर्व छूते-छूते १० जप पूरे होते हैं।
- इस प्रकार:
- १० × १० = १०० जप
- १० × १० × १० = १००० जप (अभ्यास से)
✋ चित्र संख्या २ (दायाँ हाथ)
- इसमें भी अंगूठे से तर्जनी, मध्यमा, अनामिका और कनिष्ठा की तीन-तीन पर्वों पर क्रमशः संख्या गिनी जाती है।
- अंगूठा घूमते हुए हर पर्व को छूता है।
- इस विधि से १ से ८ तक की एक करमाला (छोटी माला) पूरी होती है।
👉 मतलब: अंगूठे से उँगलियों के पर्व छूते-छूते ८ जप पूरे होते हैं।
- इस प्रकार:
- ८ × १ = ८ जप
१०८ जप कैसे पूरे होते हैं?
👉 इन चित्रों को मिलाकर दिखाया गया है कि कैसे-
१ से १० तक उँगलियों के पर्व गिनकर १०० जप संख्या बनती हैं।
और १ से ८ तक उँगलियों के पर्व गिनकर ८ जप संख्या बनती हैं।
इस प्रकार १०० + ८ = १०८ (पूर्ण माला) की जाती है।
अन्य विधि द्वारा १०८ जप कैसे पूरे होते हैं?
- अब दूसरी विधि में, पहले हाथ की १२ की पर्व को
अंगुठे से ९ बार गिना जाता है। - उँगलियों के कुल पर्व = १२
- इस प्रकार:
- १२ × ९ = १०८ जप
- इसलिए गायत्री मंत्र की १०८ जप की माला इसी विधि से पूरी की जाती है।
जप की मूल रचना (१०८ कैसे बनते हैं?)
- एक उँगली में ३ पर्व होते हैं
- चार उँगलियाँ × ३ पर्व = १२ पर्व
- १२ पर्व × ९ चक्र = १०८ जप
✋ स्टेप-बाय-स्टेप विधि
चरण १: प्रारंभ
- दाएँ हाथ की मध्यमा उँगली के पहले पर्व से शुरू करें
- अंगूठे से स्पर्श करें
- एक बार गायत्री मंत्र का जप करें
चरण २: क्रम
- मध्यमा → अनामिका → कनिष्ठा
- हर उँगली के तीनों पर्वों पर १-१ जप
- फिर तर्जनी को छोड़ते हुए
- पुनः मध्यमा पर लौटें
👉 इस तरह एक चक्र में १२ जप पूरे होते हैं
चरण ३: चक्र गिनना (९ चक्र)
- हर १२ जप के बाद
- बाएँ हाथ की उँगली मोड़कर १ चक्र गिनें
- कुल ९ चक्र पूरे करने पर १०८ जप
जप का तरीका
- जप मानसिक (मन में) करें
- श्वास के साथ तालमेल रखें
- मंत्र का अर्थ भी मन में रखें
जप के समय विशेष नियम
✔ स्नान या शुद्धता
✔ शांत स्थान
✔ एकाग्र मन
✔ नियमित समय (सुबह श्रेष्ठ)
✔ श्रद्धा और संयम
जप के बाद
- दोनों हाथ जोड़कर
“माता गायत्री! यह जप स्वीकार करें” - १–२ मिनट मौन रहें।
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