१२. शान्तिपर्व- महाभारत

शान्ति पर्व में युद्ध की समाप्ति पर युधिष्ठिर का शोकाकुल होकर पश्चाताप करना, श्री कृष्ण सहित सभी लोगों द्वारा उन्हें समझाना, युधिष्ठिर का नगर प्रवेश और राज्याभिषेक, सबके साथ पितामह भीष्म के पास जाना, भीष्म के द्वारा श्रीकृष्ण की स्तुति, भीष्म द्वारा युधिष्ठिर के प्रश्नों का उत्तर तथा उन्हें राजधर्म, आपद्धर्म और मोक्षधर्म का उपदेश करना आदि वर्णित है।

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१०. सौप्तिकपर्व- महाभारत

में अश्वत्थामा, कृतवर्मा और कृपाचार्य- कौरव पक्ष के शेष इन तीन महारथियों का वन में विश्राम करना, तीनों की आगे के कार्य के विषय में विस्तार पूर्वक मत्रणा करना, अश्वत्थामा द्वारा रात्रि मे चोरी से पाण्डवों के शिविर में घुसकर समस्त सोये हुए पांचाल वीरों का संहार करना, द्रौपदी के पुत्रों का वध करना, द्रौपदी का विलाप तथा द्रोणपुत्र के वध का आग्रह करना, भीम द्वारा अश्वत्थामा को मारने के लिए प्रस्थान करना और श्रीकृष्ण, अर्जुन तथा युधिष्ठिर का भी भीम के पीछे जाना, गंगातट पर बैठे अश्वत्थामा को भीम द्वारा ललकारना, अश्वत्थामा द्वारा ब्रह्मास्त्र का प्रयोग करना, अर्जुन द्वारा भी उस ब्रह्मास्त्र के निवारण के लिए ब्रह्मास्त्र का प्रयोग करना, व्यास की आज्ञा से अर्जुन द्बारा ब्रह्मास्त्र का उपशमन करना, अश्वत्थामा की मणि को निकाल लेना आदि विषय इस पर्व में वर्णित है।

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