शिव-शक्ति श्रीराम मिलन भाग- 5 (शिव-पार्वती विवाह)

नारदजी ने पूर्वजन्म की कथा सुनाकर सबको समझाया (और कहा) कि हे मैना! तुम मेरी सच्ची बात सुनो, तुम्हारी यह लड़की साक्षात जगज्जनी भवानी है। ये अजन्मा, अनादि और अविनाशिनी शक्ति हैं। सदा शिवजी के अर्द्धांग में रहती हैं। ये जगत की उत्पत्ति, पालन और संहार करने वाली हैं और अपनी इच्छा से ही लीला शरीर धारण करती हैं।

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शिव-शक्ति श्रीराम मिलन भाग- 4 (शिव बारात)

शिव-शक्ति श्रीराम मिलन (चतुर्थ भाग) श्री रामचन्द्रजी ने बहुत प्रकार से शिवजी को समझाया और पार्वतीजी का जन्म सुनाया। कृपानिधान श्री रामचन्द्रजी ने विस्तार पूर्वक पार्वतीजी की अत्यन्त पवित्र करनी का वर्णन किया।

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शिव-शक्ति श्रीराम मिलन भाग- 3 (पार्वती का जन्म)

सतीजी ने भरी सभा मे क्रोधित होकर कहाँ कि, चन्द्रमा को ललाट पर धारण करने वाले वृषकेतु शिवजी को हृदय में धारण करके मैं इस शरीर को तुरंत ही त्याग दूँगी। ऐसा कहकर सतीजी ने योगाग्नि में अपना शरीर भस्म कर डाला। सारी यज्ञशाला में हाहाकार मच गया। तब सती का मरण सुनकर शिवजी के गण यज्ञ विध्वंस करने लगे।

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शिव-शक्ति श्रीराम मिलन भाग- 2 (सती का आत्मदाह)

सतीजी ने सीताजी का वेष धारण किया, यह जानकर शिवजी के हृदय में बड़ा विषाद हुआ। उन्होंने सोचा कि यदि मैं अब सती से प्रीति करता हूँ तो भक्तिमार्ग लुप्त हो जाता है और बड़ा अन्याय होता है। सती परम पवित्र हैं, इसलिए इन्हें छोड़ते भी नहीं बनता और प्रेम करने में बड़ा पाप है।

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शिव-शक्ति श्रीराम मिलन भाग- 1 (श्रीराम की परीक्षा)

एक बार त्रेता युग में शिवजी अगस्त्य ऋषि के पास गए। उनके साथ जगज्जननी भवानी सतीजी भी थीं। ऋषि ने संपूर्ण जगत्‌ के ईश्वर जानकर उनका पूजन किया। मुनिवर अगस्त्यजी ने रामकथा विस्तार से कही, जिसको महेश्वर ने परम सुख मानकर सुना। फिर ऋषि ने शिवजी से सुंदर हरिभक्ति पूछी और शिवजी ने उनको अधिकारी पाकर (रहस्य सहित) भक्ति का निरूपण किया।

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The Story Of Kaal | काल कौन था और कैसे हुई थी कलयुग की रचना?

काल कौन था और कैसे हुई थी कलयुग की रचना जाने विस्तार पूर्वक। ।मुख पृष्ठ।।पोस्ट।।काल और कलयुग की रचना। काल

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क्या है मार्कण्डेय ऋषि और यमराज की कथा | Markandey Rishi

आप लोगों ने कई ऋषियों और महर्षियों की कथाऐं सुनी होंगी। और उनके जीवन से आपको प्रेरणा भी मिली होगी। ऐसे ही एक महान व्यक्तित्व वाले शिव भक्त ऋषि थे मार्कण्डेय ऋषि।

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श्री गणेश की जन्म कथा | The Birth Story Of The Shri Ganesh

एक बार सृष्टि (प्रकृति) ने संपूर्ण शक्तियों से युक्त एक पार्वती पुत्र की कामना की और उस (श्री गणेश) की जन्म का कारण बनाया जया और विजया नामक पार्वती की सखियों को।

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शनिदेव का जन्म कथा | Sahanidev Ka Janm Katha

शनिदेव का नाम आते ही अधिकांश लोग भयभीत हो जाते हैं। लोगों का मानना है कि शनिदेव अत्यंत ही क्रोधी स्वभाव के हैं और अशुभ फल ही प्रदान करते हैं।

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काल भैरव – शिव के दूसरे स्वरूप | Kaal Bhairav Jayanti 2023

शिव के दूसरे रूप काल भैरव जयन्ती की कृष्ण पक्ष की अष्टमी के दिन जयन्ती की अपनी अलग ही विशेषता है। ये अपने भक्तों की संपूर्ण मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

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भगवान विष्णु का जन्म कथा एवं सृष्टि की रचना

विष्णु का जन्म जब संपूर्ण ब्रह्मांड मे केवल रात्रि का ही साम्राज्य था। उस समय केवल एकमात्र ‘सत ब्रह्म’ अर्थात सदाशिव की ही सत्ता विद्ध्मान थी।

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भगवान शिव जन्म कथा | What Is The Shiv Janm katha

शिव का जन्म- जब संपूर्ण ब्रह्मांड जलमग्न था, तब ब्रह्मा, विष्णु और महेश के अलावा कोई भी अस्तित्व में नहीं था। तब भगवान विष्णु ही शेषनाग पर विश्राम करते हुए नजर

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रामसेतु एक अजूबा | Ramsetu Ek Ajooba

रामसेतु एक अजूबा- भगवान श्रीराम की वानर सेना द्वारा रावण से पत्नी सीता को बचाने के लिए और भगवान श्रीराम को लंका पहुंचाने के लिए इस सेतु का निर्माण किया गया था।

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संपूर्ण कवच- “श” से “ह” तक

संपूर्ण कवच- “श” से “ह” तक ॥ 卐 ॥॥ श्री गणेशाय नमः ॥॥ श्री कमलापति नम: ॥॥ श्री जानकीवल्लभो विजयते

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संपूर्ण कवच “भ” से “व” तक

आपके चारों ओर नकारात्मकता को खत्म करने के लिए एक शक्तिशाली मंत्रो के संग्रह को कवच कहते है। यह किसी भी बुरी आत्माओं से रक्षा करने में एक कवच के रूप में कार्य करता है।

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१८. स्वर्गारोहणपर्व- महाभारत

॥ 卐 ॥॥ श्री गणेशाय नमः ॥॥ श्री कमलापति नम: ॥॥ श्री जानकीवल्लभो विजयते ॥॥ श्री गुरूदेवाय नमः ॥ दान

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धनतेरस पूजा विधि, आरती और मंत्र- 2022 | Dhanteras Puja Vidhi

।मुख पृष्ठ।।पोस्ट।।धनतेरस पूजा विधि, आरती और मंत्र। धनतेरस पूजा विधि, आरती और मंत्र हमारे देश हिन्दुस्तान में धनतेरस को बहुत

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१६. मौसलपर्व- महाभारत

॥ 卐 ॥॥ श्री गणेशाय नमः ॥॥ श्री कमलापति नम: ॥॥ श्री जानकीवल्लभो विजयते ॥॥ श्री गुरूदेवाय नमः ॥ दान

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छठ पूजा विधि, मंत्र, आरती और कथा | Chhath Puja

एकमात्र ऐसा त्यौहार जो भगवान को श्रद्धांजलि देता है जो पृथ्वी पर प्रकाश और ऊर्जा लाता है, छठ पूजा में कई अनुष्ठान शामिल हैं जिसमे वैदिक देवता-सूर्य की पूजा कार्तिकेय के महीने में 4 दिनों तक की जाती है जो आमतौर पर अक्टूबर या नवंबर में पड़ता है।

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१५. आश्रमवासिकपर्व- महाभारत

आश्रमवासिकपर्व में भाइयों समेत युधिष्ठिर और कुन्ती द्वारा धृतराष्ट्र तथा गान्धारी की सेवा, व्यास जी के समझाने पर धृतराष्ट्र, गान्धारी और कुन्ती को वन में जाने देना, वहाँ जाकर इन तीनों का ॠषियों के आश्रम में निवास करना,

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१४. आश्वमेधिकपर्व- महाभारत

आश्वमेधिकपर्व में महर्षि व्यास द्वारा यज्ञ के लिए धन प्राप्त करने का उपाय युधिष्ठिर से बताना, अर्जुन द्वारा कृष्ण से गीता का विषय पूछना, श्री कृष्ण द्वारा अनेक आख्यानों द्वरा अर्जुन का समाधान करना, ब्राह्मणगीता का उपदेश, अन्य आध्यात्मिक बातें, अर्जुन द्वारा कृष्ण से गीता का विषय पूछना, ब्राह्मणगीता का उपदेश।

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दीपावली पूजन विधि और मंत्र | Diwali Poojan Vidhi Aur Mantr

कलावा, रोली, सिंदूर, एक नारियल, अक्षत, लाल वस्त्र , फूल, पांच सुपारी, लौंग, पान के पत्ते, घी, कलश, कलश हेतु आम का पल्लव, चौकी, समिधा, हवन कुण्ड, हवन सामग्री, कमल गट्टे, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल), फल, बताशे, मिठाईयां, पूजा में बैठने हेतु आसन, हल्दी, अगरबत्ती, कुमकुम, इत्र, दीपक, रूई, आरती की थाली। कुशा, रक्त चंदनद, श्रीखंड चंदन।

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दीपावली पर्व की कथा | Diwali Parv kee Katha

मित्रों! सनातन धर्म जो है वो सत्य, संस्कार, शास्त्रों और पौराणिक कथाओं का एक भण्डार है। आप जितना ही इसे समझने का प्रयास करेंगे उतना ही सत्य आपके समक्ष आता ही रहेगा। चलिए हम आज के सत्य और पौराणिक कथा पर आते है।

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संपूर्ण कवच- “द” से “भ” तक

आपके चारों ओर नकारात्मकता को खत्म करने के लिए एक शक्तिशाली मंत्रो के संग्रह को कवच कहते है। यह किसी भी बुरी आत्माओं से रक्षा करने में एक कवच के रूप में कार्य करता है।

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संपूर्ण कवच- “अ” से “त्र” तक

आपके चारों ओर नकारात्मकता को खत्म करने के लिए एक शक्तिशाली मंत्रों के संग्रह को कवच कहते है। यह किसी भी बुरी आत्माओं से रक्षा करने में एक कवच के रूप में कार्य करता है।

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