शिव-शक्ति श्रीराम मिलन भाग- 2 (सती का आत्मदाह)

सतीजी ने सीताजी का वेष धारण किया, यह जानकर शिवजी के हृदय में बड़ा विषाद हुआ। उन्होंने सोचा कि यदि मैं अब सती से प्रीति करता हूँ तो भक्तिमार्ग लुप्त हो जाता है और बड़ा अन्याय होता है। सती परम पवित्र हैं, इसलिए इन्हें छोड़ते भी नहीं बनता और प्रेम करने में बड़ा पाप है।

और अधिक पढ़ें
0%
 📖 आगे पढ़ें 
 SHORTS
Trishul