९. शल्यपर्व- महाभारत

में कर्ण की मृत्यु के पश्चात कृपाचार्य द्वारा सन्धि के लिए दुर्योधन को समझाना, सेनापति पद पर शल्य का अभिषेक करना, मद्रराज और शल्य का अदभुत पराक्रम, युधिष्ठिर द्वारा शल्य और उनके भाई का वध करना, सहदेव द्वारा शकुनि का वध करना, दुर्योधन का वहा से पलायन, युधिष्ठिर का दुर्योधन से संवाद करना, दुर्योधन के साथ भीम का वाग्युद्ध और गदा युद्ध करना और दुर्योधन का धराशायी होना, सेनापति पद पर अश्वत्थामा का अभिषेक आदि वर्णित है।

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