गंगा दशहरा मुहूर्त, पूजा- विधि, आरती और कथा | Ganga Dashahra
गंगा दशहरा हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है जो ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को मनाया जाता है। इसी दिन मां गंगा का अवतरण पृथ्वी पर हुआ था। गंगा दशहरा का त्यौहार प्रत्येक..
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गंगा दशहरा हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है जो ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को मनाया जाता है। इसी दिन मां गंगा का अवतरण पृथ्वी पर हुआ था। गंगा दशहरा का त्यौहार प्रत्येक..
और अधिक पढ़ेंशास्त्रों में शनि दोष से मुक्ति और इसके प्रकोप से बचने के लिए शनि स्तोत्र का पाठ करना बहुत लाभकारी बताया गया है। इसे दशरथकृत शनि स्तोत्र भी कहा जाता हैं।
और अधिक पढ़ेंनववर्ष संपूर्ण जगत में एक त्यौहार के रूप में मनाया जाता है। दुनिया के भिन्न-भिन्न स्थानों पर नववर्ष की तिथि भी भिन्न-भिन्न होती है। इस साल 2024 में हिन्दू नववर्ष विक्रम संवत 2081, पिंगल संवत्सर का स्वागत मंगलवार 9 अप्रैल 2024 के दिन किया जायेगा। हिन्दू धर्म में इस दिन को शुभ दिन माना जाता है।
और अधिक पढ़ेंकरवा चौथ शादीशुदा या विवाहित महिलाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण व्रत है। यह व्रत कार्तिक कृष्ण की चंद्रोदय व्यापिनी चतुर्थी को किया जाता है। यदि दो दिन चंद्रोदय हो या दोनों दिन न हो तो ‘मातृविद्धा प्रशस्त्यते’ के अनुसार पूर्वविधा लेनी चाहिए।
और अधिक पढ़ेंश्री सत्यनारायण व्रत कथा, सत्यनारायण पूजा भगवान विष्णु की एक धार्मिक अनुष्ठान पूजा है। मध्यकालीन युग के संस्कृत पाठ स्कंद पुराण में पूजा का वर्णन किया गया है।
और अधिक पढ़ेंकलयुग की रचना जब सभी देवताओं की सभा चल रही था तो उस वक्त काल बीच सभा में नाराज और सभा को बीच मे ही छोड़ कर चला जाता हैं उसकी इस नाराजगी से सभी देवता डर जाते हैं
और अधिक पढ़ेंआप लोगों ने कई ऋषियों और महर्षियों की कथाऐं सुनी होंगी। और उनके जीवन से आपको प्रेरणा भी मिली होगी। ऐसे ही एक महान व्यक्तित्व वाले शिव भक्त ऋषि थे मार्कण्डेय ऋषि।
और अधिक पढ़ेंएक बार सृष्टि (प्रकृति) ने संपूर्ण शक्तियों से युक्त एक पार्वती पुत्र की कामना की और उस (श्री गणेश) की जन्म का कारण बनाया जया और विजया नामक पार्वती की सखियों को।
और अधिक पढ़ेंशनिदेव का नाम आते ही अधिकांश लोग भयभीत हो जाते हैं। लोगों का मानना है कि शनिदेव अत्यंत ही क्रोधी स्वभाव के हैं और अशुभ फल ही प्रदान करते हैं।
और अधिक पढ़ेंशिव के दूसरे रूप काल भैरव जयन्ती की कृष्ण पक्ष की अष्टमी के दिन जयन्ती की अपनी अलग ही विशेषता है। ये अपने भक्तों की संपूर्ण मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
और अधिक पढ़ेंविष्णु का जन्म जब संपूर्ण ब्रह्मांड मे केवल रात्रि का ही साम्राज्य था। उस समय केवल एकमात्र ‘सत ब्रह्म’ अर्थात सदाशिव की ही सत्ता विद्ध्मान थी।
और अधिक पढ़ेंशिव जन्म- जब संपूर्ण ब्रह्मांड जलमग्न था, तब ब्रह्मा, विष्णु और महेश के अलावा कोई भी अस्तित्व में नहीं था। तब भगवान विष्णु ही शेषनाग पर विश्राम करते हुए नजर
और अधिक पढ़ेंरामसेतु एक अजूबा- भगवान श्रीराम की वानर सेना द्वारा रावण से पत्नी सीता को बचाने के लिए और भगवान श्रीराम को लंका पहुंचाने के लिए इस सेतु का निर्माण किया गया था।
और अधिक पढ़ेंहमारे देश हिन्दुस्तान में धनतेरस को बहुत श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस दिन माता लक्ष्मी, गणेशजी, कुबेर देवता और धन्वंतरि जी की विधि-विधान से पूजा की जाती है।
और अधिक पढ़ेंएकमात्र ऐसा त्यौहार जो भगवान को श्रद्धांजलि देता है जो पृथ्वी पर प्रकाश और ऊर्जा लाता है, छठ पूजा में कई अनुष्ठान शामिल हैं जिसमे वैदिक देवता-सूर्य की पूजा कार्तिकेय के महीने में 4 दिनों तक की जाती है जो आमतौर पर अक्टूबर या नवंबर में पड़ता है।
और अधिक पढ़ेंधनतेरस प्रकृति जब चाहती है तो वह किसी के भी साथ कुछ भी कर सकती है वह चाहे तो राजा को भिखारी और भिखारी को राजा बना देती है ऐसे ही एक कहानी एक गरीब किसान की भी थी।
और अधिक पढ़ेंकहते है प्रकृति जब स्वयं चाहती है तब ही कुछ घटनाऐ घटती है। और तब ही आप कुछ नया ज्ञान आपको सीखने को भी मिलता है। ऐसा ही कुछ मेरे साथ भी हुआ था आज से लगभग 22 से 25 बर्ष पहले।
और अधिक पढ़ेंकलावा, रोली, सिंदूर, एक नारियल, अक्षत, लाल वस्त्र , फूल, पांच सुपारी, लौंग, पान के पत्ते, घी, कलश, कलश हेतु आम का पल्लव, चौकी, समिधा, हवन कुण्ड, हवन सामग्री, कमल गट्टे, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल), फल, बताशे, मिठाईयां, पूजा में बैठने हेतु आसन, हल्दी, अगरबत्ती, कुमकुम, इत्र, दीपक, रूई, आरती की थाली। कुशा, रक्त चंदनद, श्रीखंड चंदन।
और अधिक पढ़ेंमित्रों! सनातन धर्म जो है वो सत्य, संस्कार, शास्त्रों और पौराणिक कथाओं का एक भण्डार है। आप जितना ही इसे समझने का प्रयास करेंगे उतना ही सत्य आपके समक्ष आता ही रहेगा। चलिए हम आज के सत्य और पौराणिक कथा पर आते है।
और अधिक पढ़ेंकुछ समय पूर्व की बात है। या यूं कहें कि कुछ युग पूर्व की बात है। उस समय एक अजीब सा कोलाहल इस विश्व में हुआ था जब धरती भी मानो अपनी धूरी से लगभग 8-10 फुट तक नीचे धस गई थी और सागर, नदी, तालाब, कूएँ सभी के जल भी मानो आकाश को स्पर्श कर रहे हो।
और अधिक पढ़ेंभारतीय पौराणिक कथाएं साधारण अच्छाई और बुराई से परे है। हिन्दू पुराणों में हर कदम पर एक दिलचस्प कहानी है। ऐसी ही एक कहानी लंकापति रावण की है। रावण ने खलनायक की भूमिका निभाई,
और अधिक पढ़ेंपुराणों के अनुसार सृष्टि के आरंभ में ब्रह्मनाद से जब शिव प्रकट हुए तो उनके साथ ‘सत’, ‘रज’ और ‘तम’ ये तीनों गुण भी जन्मे थे। यही तीनों गुण शिव के ‘तीन शूल’ यानी ‘त्रिशूल’ कहलाए। संगीत प्रकृति के हर कण में मौजूद है। भगवान शिव को ‘संगीत का जनक’ माना जाता है।
और अधिक पढ़ेंसृष्टि के प्रारम्भ में भगवान नारायण के नाभिकमल से सर्व प्रथम ब्रह्मा जी का प्राकट्य हुआ। इसी से वे पद्मयोनि भी कहलाते हैं। नारायण की इच्छाशक्ति की प्रेरणा से स्वयं उत्पन्न होने के कारण ये स्वयम्भू भी कहलाते है।
और अधिक पढ़ेंबहुत पुरानी बात है, उस समय सत्ययुग चल रहा था। एक बार भगवान ब्रह्मा के मानस-पुत्र ऋषि सनकादि, जिनकी आयु हमेशा पंचवर्षीय बालक कीसी ही रहती है, वैकुण्ठ लोक में जा पहुँचे। वे भगवान् विष्णु के पास जाना चाहते थे
और अधिक पढ़ेंऋषि दुर्वासा सतयुग, त्रेता एवं द्वापर तीनों युगों में मौजूद थे। पुराणों के अध्ययन से पता चलता है कि वशिष्ठ, अत्रि, विश्वामित्र, दुर्वासा, अश्वत्थामा, राजा बलि, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य, परशुराम, मार्कण्डेय ऋषि, वेद व्यास और जामवन्त आदि कई ऋषि, मुनि और देवता हुए हैं जिनका जिक्र सभी युगों में पाया जाता है।
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