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काल भैरव – शिव के दूसरे स्वरूप | Kaal Bhairav

कालभैरव

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कालभैरव
काल भैरव जयन्ती

काल भैरव जयन्ती

शास्त्रों मे शिव के दूसरे रूप अर्थात काल भैरव की मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की अष्टमी के दिन जयन्ती की अपनी अलग ही विशेषता है। ये अपने भक्तों की संपूर्ण मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

काल भैरव की पूजा करने से लौकिक और परलौकिक जितने भी बाधाएं होती हैं सब टल जाती हैं। काल भैरव महाराज की पूजा करने से संपूर्ण मनोकामनाएं तो पूर्ण होती ही हैं साथ ही ये भी माना जाता है कि इससे भक्त की उम्र भी बढ़ती है। जब व्यक्ति स्वयं को अत्यधिक परेशानियों से घिरा हुआ पाता है और सभी प्रयास भी असफल होने लगते है, तब ऐसे में कालभैरव की पूजा अत्यंत ही लाभकारी सिद्ध होती है।

शिवपुराण का वर्णन

शिवपुराण में भगवान शिव के कई अवतारों का वर्णन मिलता है, इसके बिषय में बहुत कम लोग ही जानते हैं। वैसे धर्म गन्थों में शिव के उन्नीस अवतारों की ही जानकारी मिलती है, इन्हीं में एक काल भैरव का रूप महत्वपूर्ण है। शिवपुराण की शतरूद्र संहिता के अनुसार भगवान शिव ने मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को इसी रूप में अवतार लिया था।
इस साल यानी की 2023 में काल भैरव जयंती 05 दिसम्बर 2023 को मनाई जायेगी।

भगवान शिव का रौद्र रूप है ‘काल भरैव’

शिव का विश्वेश्वर स्वरूप अत्यन्त ही सौम्य, शांत है। वहीं उनका काल भैरव रूप अत्यन्त ही रौद्र, भयानक, विकराल और प्रचण्ड है। इसी रूप ने ही प्रजापिता श्री ब्रह्मा का गर्व का मर्दन किया था और अपनी अंगुली के नाखून से उनके पांचवे सिर को काट दिया था। तब से ही भैरव ब्रह्महत्या के पाप से दोषी हो गए। अंततः इन्हें काशी तीर्थ में ब्रह्महत्या से मुक्ति मिली। तभी से काल भैरव काशी के कोतवाल (नगर रक्षक) हैं और काशी में इनकी पूजा का अत्यधिक महत्व है।

काल भैरव की पूजा कब करें.?

काशी में इनके बटुक भैरव, काल भैरव, आनन्द भैरव आदि नामो के कई मंदिर भी हैं। भैरव का जन्म दोपहर के समय में हुआ था, इसलिए मध्याह्मव्यापिनी अष्टमी लेनी चाहिये। और इस दिन प्रातः काल उठकर नित्यकर्म एवं स्नान से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प करना चाहिये और भैरव के मंदिर में जाकर वाहन सहित उनकी विधि-विधान से पूजा करनी चाहिये।
‘ऊँ भैरवाय नमः’ इस नाम मंत्र से षोडशोपचार पूर्वक ही पूजन करना चाहिये।

काल भैरव जयंती पर करें ये उपाय

काल भैरव का वाहन कुत्ता है, इसका मतलब इस दिन कुत्तों को मिठाईया खिलानी चाहिये। इस दिन उपवास कर के भगवान काल भैरव के समीप जागरण करने से इन्सान संपूर्ण पापों से मुक्त हो जाता है। हालांकि इस बार बुधवार को यह पर्व पड़ रहा है लेकिन यदि भैरवाष्टमी मंगलवार या रविवार को पड़े तो उसका महत्व कई गुना तक बढ़ जाता है। इनकी पूजा से सभी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा स्वतः ही नष्ट हो जाते हैं। इस दिन गंगा में स्नान, पितरों का तर्पण और श्राद्ध करने के बाद इनकी पूजा करने से साल भर के लिए लौकिक और परलौकिक विघ्न टल जाते हैं और मान्यता के अनुसार साधक की आयु में वृद्धि होना भी सम्भव है।

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