आओ चलें महाकुम्भ – एक ऐसी दुनिया जो मोक्ष का मार्ग है।

महाकुम्भ आस्था, विश्वास, सौहार्द एवं संस्कृतियों के मिलन का पर्व है “महाकुम्भ”। ज्ञान, चेतना और उसका परस्पर मंथन कुम्भ मेले का वो आयाम है जो आदि काल से ही हिन्दू धर्मावलम्बियों की जागृत चेतना को बिना किसी आमन्त्रण के खींच कर ले आता है।

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मुण्डन या चूडाकर्म संस्कार

इस संस्कार में शिशु के सिर के बाल पहली बार उतारे जाते हैं। लौकिक रीति यह प्रचलित है कि मुण्डन, बालक की आयु एक वर्ष की होने तक करा लें अथवा दो वर्ष पूरा होने पर तीसरे वर्ष में कराएँ।

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कलश स्थापना, पूजन विधि और मंत्र

कलश स्थापना और पूजन लगभग हर अनुष्ठान में किया जाता है। सामान्य रूप से कलश को पहले से तैयार रखा जाता है और पूजन क्रम के दौरान इसकी पूजा की जाती है।

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Go And Get Your MNSGranth Certificate Now

इस सर्टिफिकेट का उद्देश्य केवल व्यक्ति विशेष को उसके कठोर परिश्रम के फल और खुशियों के पल को जीवित रखना है। कि किस प्रकार उसने नियमित रूप से पाठ करते हुए यह सर्टिफिकेट प्राप्त किया है।

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क्षमायाचना मंत्र

क्षमायाचना मंत्र कई बार हम जाने-अनजाने में ऐसी गलतियां कर देते हैं जिनके विषय में हमें पता नहीं होता। जब तक आपको इस बात का पता चलता है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।

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सही और शुद्ध स्वस्तिक बनाने की सात्विक विधि

स्वस्तिक शब्द सु+अस+क से लिया गया है। ‘सु’ का अर्थ है अच्छा, ‘अस’ का ‘सत्ता’ या ‘अस्तित्व’ और ‘क’ का ‘कर्त्ता’ या करने वाले से है। ‘अच्छा’ या ‘मंगल’ करने वाला।

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निलावंती एक श्रापित ग्रंथ संपूर्ण कथा- 7

निलावंती को भगवान शिव के गणो में शामिल होने के लिये आवश्यक तावीज तो मिल गया था लेकिन उसने सोचा की वह जाने से पहले आज तक उसने जितना ज्ञान इकट्ठा किया है उसकी विरासत ग्रंथ के रूप में पीछे छोड़ना चाहती थी।

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निलावंती एक श्रापित ग्रंथ संपूर्ण कथा- 6

निलावंतीपहली बार पिलाया जाने वाला पानी जंगल में रख कर जब सभी पशु, पक्षी, जानवर पी ले तो उसका एक घूँट बच्चे को उन सभी जानवरों की भाषा का ज्ञानी बनायेगा जिन्होंने वह पानी पिया है।

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निलावंती एक श्रापित ग्रंथ संपूर्ण कथा- 5

निलावंती रावसाहेब और बाबु दोनों ही मूर्ति के पास पहुँचे और सोचने लगे की अब आगे क्या? तभी मूर्ति जिसकी पीठ इनकी तरफ थी वह अपना सर इनकी तरफ घुमाने लगी। दोनों ही डर से काँपने लगे उन्हें समझ आया की क्यों बाजिद की खोज में आया हर इंसान मरा हुआ पाया गया था।

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निलावंती एक श्रापित ग्रंथ संपूर्ण कथा- 4

निलावंती अमावस की रात जैसे जैसे करीब आने लगीं वैसे वैसे कन्नम मुझे किसी बच्चे को लाने के लिये पीछे पड़ गया। मैंने भी कह दिया की मैं एक बच्चे को चुन चुका हूँ और बड़ी आसानी से मैं अमावस को उसे वहाँ लाऊँगा

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निलावंती एक श्रापित ग्रंथ संपूर्ण कथा- 3

मैं चाहता था की बीवी को चिल्लाकर उठा दूं और भाग जाने के लिये कहुँ। लेकिन मैं कुछ नहीं कर पाया। मैंने धीरे से छुरा और खोपड़ी बगल में रख दी अब मेरे हाथ बहुत सफाई से बीवी का गला घोट रहे थे। मेरी अभागी बीवी को आँखें खोलने तक का मौका नहीं मिला।

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निलावंती एक श्रापित ग्रंथ संपूर्ण कथा- 2

मुख पृष्ठटैग: हिन्दुत्वमुख पृष्ठनिलावंती एक श्रापित ग्रंथकथा- 2 निलावंती एक श्रापित ग्रंथ निलावंती के विषय में और एक बात प्रसिद्ध

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निलावंती एक श्रापित ग्रंथ संपूर्ण कथा- 1

मुख पृष्ठटैग: हिन्दुत्वमुख पृष्ठनिलावंती एक श्रापित ग्रंथकथा- 1 निलावंती एक श्रापित ग्रंथ दोस्तों यह बहुत समय पहले की बात है।

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कभी गोपाला तो कभी नंदलाला पढ़ना न भूले श्री कृष्णा के 108 नाम

दोस्तों जन्माष्टमी के दिन भगवान श्री कृष्णा के 108 नामों का जाप करने से भगवान बहुत जल्द प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं जल्द ही पूरी करते हैं।

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हिन्दू नववर्ष का विक्रम संवत 2081 में प्रवेश Hindu Navavarsh

नववर्ष संपूर्ण जगत में एक त्यौहार के रूप में मनाया जाता है। दुनिया के भिन्न-भिन्न स्थानों पर नववर्ष की तिथि भी भिन्न-भिन्न होती है। इस साल 2024 में हिन्दू नववर्ष विक्रम संवत 2081, पिंगल संवत्सर का स्वागत मंगलवार 9 अप्रैल 2024 के दिन किया जायेगा। हिन्दू धर्म में इस दिन को शुभ दिन माना जाता है।

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जानिए वर्ष 2026 के प्रमुख हिन्दू व्रत और त्यौहारो की तिथियां

जानिए वर्ष 2024 के प्रमुख हिन्दू व्रत और त्यौहारो की तिथियां

दोस्तों हिंदू पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 धार्मिक त्योहारों और व्रतों से भरा रहेगा। इस वर्ष का प्रत्येक माह भक्ति, प्रार्थना और आस्था से परिपूर्ण होगा। मकर संक्रांति से लेकर दिवाली तक। आइए जानते है विस्तार पूर्वक…

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गोत्र क्या होता है, और क्यों है इसका महत्व

बहुत से लोगों को यह नहीं पता होता है कि गोत्र क्या होता है और उनका गोत्र क्या है। ऐसे में आज हम विस्तार से जानेंगे कि हिन्दू धर्म में गोत्र का क्या महत्व है और इसे कैसे पता लगाया जा सकता है। गोत्र का अर्थ होता है कुल ..

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श्री दुर्गा सप्तशती के इन उपायों को कर लिया तो होगा चमत्कार।

श्री दुर्गा सप्तशती के इन उपायों को कर लिया तो होगी धनवर्षा, आसपास भी नहीं भटकेगी दरिद्रता, मिलेगा मान सम्मान, यश और होगा चमत्कार भी।

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शिव-शक्ति श्रीराम मिलन भाग- 15 (धनुषयज्ञ और सीताजी का वर्णन)

हे सीता! हमारी सच्ची आसीस सुनो, तुम्हारी मनःकामना पूरी होगी। नारदजी का वचन सदा पवित्र (संशय, भ्रम आदि दोषों से रहित) और सत्य है। जिसमें तुम्हारा मन अनुरक्त हो गया है, वही वर तुमको मिलेगा। इस प्रकार श्री गौरीजी का आशीर्वाद सुनकर जानकीजी समेत सब सखियाँ हृदय में हर्षित हुईं।

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शिव-शक्ति श्रीराम मिलन भाग- 14 (राम-सीता का प्रथम मिलन)

सीताजी की शोभा देखकर श्री रामजी ने बड़ा सुख पाया। हृदय में वे उसकी सराहना करते हैं, किन्तु मुख से वचन नहीं निकलते। (वह शोभा ऐसी अनुपम है) मानो ब्रह्मा ने अपनी सारी निपुणता को मूर्तिमान कर संसार को प्रकट करके दिखा दिया हो।

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शिव-शक्ति श्रीराम मिलन भाग- 13 (ताड़का वध और अहल्या उद्धार)

राजा ने बड़े ही आदर से दोनों पुत्रों को बुलाया और हृदय से लगाकर बहुत प्रकार से उन्हें शिक्षा दी। (फिर कहा-) हे नाथ! ये दोनों पुत्र मेरे प्राण हैं। हे मुनि! (अब) आप ही इनके पिता हैं, दूसरा कोई नहीं। राजा ने बहुत प्रकार से आशीर्वाद देकर पुत्रों को ऋषि के हवाले कर दिया।

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शिव-शक्ति श्रीराम मिलन भाग- 12 (नामकरण सस्कार और बाललीला)

शिव-शक्ति श्रीराम मिलन गुरु वशिष्‍ठजी ने हृदय में विचार कर कहा- हे राजन्‌! तुम्हारे चारों पुत्र वेद के तत्त्व (साक्षात्‌ परात्पर भगवान) हैं। जो ब्राह्मणों के ऋणी, मुनियों के धन, भक्तों के सर्वस्व और शिवजी के प्राण हैं, उन्होंने (इस समय तुम लोगों के प्रेमवश) बाल लीला के रस में सुख माना है।

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शिव-शक्ति श्रीराम मिलन भाग- 10 (पृथ्वी की व्याकुलता)

धर्म के प्रति लोगों की अतिशय ग्लानि देखकर पृथ्वी अत्यन्त भयभीत एवं व्याकुल हो गई। वह सोचने लगी कि पर्वतों, नदियों और समुद्रों का बोझ मुझे इतना भारी नहीं जान पड़ता, जितना भारी मुझे एक परद्रोही (दूसरों का अनिष्ट करने वाला) लगता है। धरती वहाँ गई, जहाँ सब देवता और मुनि (छिपे) थे। पृथ्वी ने रोकर उनको अपना दुःख सुनाया।

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शिव-शक्ति श्रीराम मिलन भाग- 9 (राजा प्रतापभानु)

सम्पूर्ण पृथ्वी मंडल का उस समय प्रतापभानु ही एकमात्र (चक्रवर्ती) राजा था। संसारभर को अपनी भुजाओं के बल से वश में करके राजा ने अपने नगर में प्रवेश किया। प्रजा सब (प्रकार के) दुःखों से रहित और सुखी थी और सभी स्त्री-पुरुष सुंदर और धर्मात्मा थे।

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शिव-शक्ति श्रीराम मिलन भाग- 8 (मनु और शतरूपा)

शिव-शक्ति श्रीराम मिलन (अष्टम भाग) स्वायम्भुव मनु और (उनकी पत्नी) शतरूपा, जिनसे मनुष्यों की यह अनुपम सृष्टि हुई, आज भी वेद जिनकी मर्यादा का गान करते हैं। एक बार उनके मन में बड़ा दुःख हुआ कि श्री हरि की भक्ति बिना जन्म युँ ही चला गया। तब उन्होंने अपना संपूर्ण….

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