शिव-शक्ति श्रीराम मिलन भाग- 7 (नारद का मोह)

शिव-शक्ति श्रीराम मिलन (सप्तम भाग) नारद ने श्रीहरि से कहा तुम दूसरों की सम्पदा नहीं देख सकते, तुम्हारे ईर्ष्या और कपट बहुत है। समुद्र मथते समय तुमने शिवजी को बावला बना दिया और देवताओं को प्रेरित करके उन्हें विषपान कराया।

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वाल्मीकि रामायण- AI बालकाण्ड सर्ग- ६

महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण- बालकाण्ड सर्ग- ६ राजा दशरथ के शासनकाल में अयोध्या और वहाँ के नागरिकों की उत्तम स्थिति का वर्णन।

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शिव-शक्ति श्रीराम मिलन भाग- 6 (श्रीराम अवतार का कारण)

विवाह के बाद जब शिवजी और पार्वती कैलास पर्वत पर पहुँचे, तब सब देवता अपने-अपने लोकों को चले गए। शिव-पार्वती विविध प्रकार के भोग-विलास करते हुए अपने गणों सहित कैलास पर रहने लगे। तभी एक दिन पार्वती ने शिवजी से…

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शिव-शक्ति श्रीराम मिलन भाग- 5 (शिव-पार्वती विवाह)

नारदजी ने पूर्वजन्म की कथा सुनाकर सबको समझाया (और कहा) कि हे मैना! तुम मेरी सच्ची बात सुनो, तुम्हारी यह लड़की साक्षात जगज्जनी भवानी है। ये अजन्मा, अनादि और अविनाशिनी शक्ति हैं। सदा शिवजी के अर्द्धांग में रहती हैं। ये जगत की उत्पत्ति, पालन और संहार करने वाली हैं और अपनी इच्छा से ही लीला शरीर धारण करती हैं।

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शिव-शक्ति श्रीराम मिलन भाग- 4 (शिव बारात)

शिव-शक्ति श्रीराम मिलन (चतुर्थ भाग) श्री रामचन्द्रजी ने बहुत प्रकार से शिवजी को समझाया और पार्वतीजी का जन्म सुनाया। कृपानिधान श्री रामचन्द्रजी ने विस्तार पूर्वक पार्वतीजी की अत्यन्त पवित्र करनी का वर्णन किया।

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शिव-शक्ति श्रीराम मिलन भाग- 3 (पार्वती का जन्म)

सतीजी ने भरी सभा मे क्रोधित होकर कहाँ कि, चन्द्रमा को ललाट पर धारण करने वाले वृषकेतु शिवजी को हृदय में धारण करके मैं इस शरीर को तुरंत ही त्याग दूँगी। ऐसा कहकर सतीजी ने योगाग्नि में अपना शरीर भस्म कर डाला। सारी यज्ञशाला में हाहाकार मच गया। तब सती का मरण सुनकर शिवजी के गण यज्ञ विध्वंस करने लगे।

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शिव-शक्ति श्रीराम मिलन भाग- 2 (सती का आत्मदाह)

सतीजी ने सीताजी का वेष धारण किया, यह जानकर शिवजी के हृदय में बड़ा विषाद हुआ। उन्होंने सोचा कि यदि मैं अब सती से प्रीति करता हूँ तो भक्तिमार्ग लुप्त हो जाता है और बड़ा अन्याय होता है। सती परम पवित्र हैं, इसलिए इन्हें छोड़ते भी नहीं बनता और प्रेम करने में बड़ा पाप है।

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शिव-शक्ति श्रीराम मिलन भाग- 1 (श्रीराम की परीक्षा)

एक बार त्रेता युग में शिवजी अगस्त्य ऋषि के पास गए। उनके साथ जगज्जननी भवानी सतीजी भी थीं। ऋषि ने संपूर्ण जगत्‌ के ईश्वर जानकर उनका पूजन किया। मुनिवर अगस्त्यजी ने रामकथा विस्तार से कही, जिसको महेश्वर ने परम सुख मानकर सुना। फिर ऋषि ने शिवजी से सुंदर हरिभक्ति पूछी और शिवजी ने उनको अधिकारी पाकर (रहस्य सहित) भक्ति का निरूपण किया।

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रामसेतु एक अजूबा | Ramsetu Ek Ajooba

रामसेतु एक अजूबा- भगवान श्रीराम की वानर सेना द्वारा रावण से पत्नी सीता को बचाने के लिए और भगवान श्रीराम को लंका पहुंचाने के लिए इस सेतु का निर्माण किया गया था।

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संपूर्ण कवच- “श” से “ह” तक

आपके चारों ओर नकारात्मकता को खत्म करने के लिए एक शक्तिशाली मंत्रो के संग्रह को कवच कहते है। यह किसी भी बुरी आत्माओं से रक्षा करने में एक कवच के रूप में कार्य करता है।

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संपूर्ण कवच “भ” से “व” तक

आपके चारों ओर नकारात्मकता को खत्म करने के लिए एक शक्तिशाली मंत्रो के संग्रह को कवच कहते है। यह किसी भी बुरी आत्माओं से रक्षा करने में एक कवच के रूप में कार्य करता है।

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दशानन- लंकापति रावण संपूर्ण कथा | The Ravan Full Story

भारतीय पौराणिक कथाएं साधारण अच्छाई और बुराई से परे है। हिन्दू पुराणों में हर कदम पर एक दिलचस्प कहानी है। ऐसी ही एक कहानी लंकापति रावण की है। रावण ने खलनायक की भूमिका निभाई,

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How To Use Hydra And Slowloris In Hindi

Hydra सबसे शक्तिशाली Termux टूल में से एक है जिसका उपयोग सेवाओं के उपयोगकर्ता नाम और पासवर्ड को बलपूर्वक क्रैक करने के लिए किया जाता है। जैसे telnet, ssh, FTP, आदि। Slowloris लो बैंडविड्थ डॉस हैकिंग ऐप है। यह टूल एक HTTP डेनियल ऑफ सर्विस अटैक करता है

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वाल्मीकि रामायण- AI बालकाण्ड सर्ग- ४

महर्षि वाल्मीकि का चौबीस हजार श्लोकों से युक्त रामायणकाव्य का निर्माण कर लव-कुशको पढ़ाना, लव और कुश का अयोध्या में श्रीराम द्वारा सम्मानित हो रामदरबार में रामायण गान सुनाना।

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ब्रह्मा अवतार तथा ब्रह्माण्ड की रचना

सृष्टि के प्रारम्भ में भगवान नारायण के नाभिकमल से सर्व प्रथम ब्रह्मा जी का प्राकट्य हुआ। इसी से वे पद्मयोनि भी कहलाते हैं। नारायण की इच्छाशक्ति की प्रेरणा से स्वयं उत्पन्न होने के कारण ये स्वयम्भू भी कहलाते है।

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भगवान नरसिंह और भक्त प्रहलाद कथा

बहुत पुरानी बात है, उस समय सत्ययुग चल रहा था। एक बार भगवान ब्रह्मा के मानस-पुत्र ऋषि सनकादि, जिनकी आयु हमेशा पंचवर्षीय बालक कीसी ही रहती है, वैकुण्ठ लोक में जा पहुँचे। वे भगवान् विष्णु के पास जाना चाहते थे

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महर्षि दुर्वासा कथा

ऋषि दुर्वासा सतयुग, त्रेता एवं द्वापर तीनों युगों में मौजूद थे। पुराणों के अध्ययन से पता चलता है कि वशिष्ठ, अत्रि, विश्वामित्र, दुर्वासा, अश्वत्थामा, राजा बलि, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य, परशुराम, मार्कण्डेय ऋषि, वेद व्यास और जामवन्त आदि कई ऋषि, मुनि और देवता हुए हैं जिनका जिक्र सभी युगों में पाया जाता है।

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वाल्मीकि रामायण- AI बालकाण्ड सर्ग- ३

वाल्मीकि मुनि द्वारा रामायण काव्य में निबद्ध विषयों का संक्षेप से उल्लेख

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कल्कि अवतार कथा

कल्कि को विष्णु का भावी अवतार माना गया है। पौराणिक कथाओं के अनुसार कलियुग में पाप की सीमा पार होने पर विश्व में दुष्टों के संहार के लिये कल्कि अवतार प्रकट होगा। पौराणिक आख्यानों के अनुसार अभी तो कलियुग का प्रथम चरण है।

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उद्योगपर्व- महाभारत (पाँचवा अध्याय)

उद्योग पर्व में विराट की सभा में पाण्डव पक्ष से श्रीकृष्ण, बलराम, सात्यकि का एकत्र होना और युद्ध के लिए द्रुपद की सहायता से पाण्डवों का युद्धसज्जित होना, संजय द्वारा धृतराष्ट्र को और धृतराष्ट्र द्वारा दुर्योधन को समझाना, पाण्डवों से परामर्श कर कृष्ण द्वारा शान्ति प्रस्ताव लेकर कौरवों के पास जाना, दुर्योधन द्वारा श्रीकृष्ण को बन्दी बनाने का षडयन्त्र करना, लौटे हुए श्रीकृष्ण द्वारा कौरवों को दण्ड देने का परामर्श, दोनों पक्षों की सेनाओं का वर्णन, भीष्म-परशुराम का युद्ध आदि विषयों का वर्णन है।

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भगवान परशुराम सम्पूर्ण कथा

भगवान परशुराम का जन्म ब्राह्मण कुल में हुआ था। उनके पिता ब्राह्मण जमदग्नि तथा माता क्षत्रिय रेणुका थी। इसलिये उनके अंदर ब्राह्मण तथा क्षत्रिय दोनों के गुण थे। उनका बचपन में नाम राम रखा गया था किंतु भगवान शिव से प्राप्त अस्त्र परशु/कुल्हाड़ी के कारण उन्हें परशुराम के नाम से जाना जाने लगा। वर्तमान में उनका जन्मस्थल मध्य प्रदेश राज्य के इंदौर में जनापाव नामक पहाड़ियां है।

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विराटपर्व- महाभारत (चौथा अध्याय)

विराट पर्व में अज्ञातवास की अवधि में विराट नगर में रहने के लिए गुप्तमन्त्रणा, धौम्य द्वारा उचित आचरण का निर्देश, युधिष्ठिर द्वारा भावी कार्यक्रम का निर्देश, कौरवों द्वारा विराट की गायों का हरण, पाण्डवों का कौरव-सेना से युद्ध, अर्जुन द्वारा विशेष रूप से युद्ध और कौरवों की पराजय, अर्जुन और कुमार उत्तर का लौटकर विराट की सभा में आना, विराट का युधिष्ठिरादि पाण्डवों से परिचय तथा अर्जुन द्वारा उत्तरा को पुत्रवधू के रूप में स्वीकार करना वर्णित है।

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महिषासुर संपूर्ण कथा

महिषासुर संपूर्ण कथा -पौराणिक कथाओं के अनुसार रम्भासुर असुरों का राजा था। एक दिन उसका जल में रहने वाले एक महिषी (भैंसे) पर मन आ गया व उसने उसके साथ संभोग किया।

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वनपर्व- महाभारत (तीसरा अध्याय)

पांडवों का वनवास, अर्जुन की तपस्या तथा दिव्यास्त्र की प्राप्ति, अर्जुन की इंद्रलोक-यात्रा, भीम की हनुमान से भेंट, दुर्योधन आदि का गर्व हरण इत्यादी घटनाक्रम है।

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सभापर्व- महाभारत (दुसरा अध्याय)

सभापर्व में मयासुर द्वारा युधिष्ठिर के लिए सभाभवन का निर्माण, लोकपालों की भिन्न-भिन्न सभाओं का वर्णन, युधिष्ठिर द्वारा राजसूय करने का संकल्प करना, जरासन्ध का वृत्तान्त तथा उसका वध, राजसूय के लिए अर्जुन आदि चार पाण्डवों की दिग्विजय यात्रा, राजसूय यज्ञ, शिशुपालवध, द्युतक्रीडा, युधिष्ठिर की द्यूत में हार और पाण्डवों का वनगमन वर्णित है।

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